Bihar News : ईको टूरिज्म का नया केंद्र बनेगा केसरिया बौद्ध स्तूप, मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश, सरोत्तर झील में बोटिंग की मिलेगी सुविधा

Bihar News : बिहार के पर्यटन मानचित्र पर विशेष पहचान रखने वाले विश्व प्रसिद्ध केसरिया बौद्ध स्तूप को ईको-टूरिज्म स्पॉट के रूप में भी विकसित किया जाएगा।

ईको टूरिज्म का नया केंद्र केसरिया बौद्ध स्तूप- फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार के पर्यटन मानचित्र पर विश्व प्रसिद्ध केसरिया बौद्ध स्तूप को ऐतिहासिक स्थल के साथ ही ईको टूरिज्म स्पॉट के तौर पर भी विकसित किया जाएगा। इसे विकसित करने की कवायद तेज हो गई है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने बुधवार को केसरिया स्तूप का निरीक्षण करके अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और स्तूप सहित आसपास के पूरे क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करने का निर्देश दिया।

इस प्रस्तावित योजना के तहत केसरिया स्तूप परिसर को पर्यटन और आध्यात्मिक अनुभव का नया केंद्र बनाने की तैयारी है। यहां जेन पार्क, चिल्ड्रेन पार्क, ध्यान केंद्र, विपश्यना केंद्र, ईको-फ्रेंडली हट्स, आकर्षक लैंडस्केपिंग, पार्किंग, कैफेटेरिया तथा अन्य आधुनिक पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वहीं प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर सरोत्तर झील को ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करते हुए बोटिंग, पार्क और मनोरंजन संबंधी सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा। बैठक में पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी श्री सौरभ सुमन यादव ने सरोत्तर झील के विकास का प्रस्ताव रखते हुए स्तूप के समग्र विस्तार के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने का सुझाव दिया, जिस पर सहमति बनी।

समीक्षा के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों ने बताया कि स्तूप की चारदीवारी से 100 मीटर तक निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। जबकि 100 से 200 मीटर के दायरे में सात मीटर से अधिक ऊंचे निर्माण की अनुमति नहीं है। इस पर अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि विकास कार्य पूरी तरह विरासत संरक्षण के मानकों के अनुरूप हों। किसी भी ऊंचे ढांचे के बजाय ईको-फ्रेंडली हट्स, हरित क्षेत्र और प्राकृतिक लैंडस्केपिंग को प्राथमिकता दी जाए, ताकि स्तूप की ऐतिहासिक गरिमा और प्राकृतिक वातावरण अक्षुण्ण रहे। साथ ही पर्यटकों की सुविधा के लिए पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। मुजफ्फरपुर के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक ने जेन पार्क, चिल्ड्रेन पार्क और ध्यान केंद्र विकसित करने का सुझाव दिया, जबकि चकिया के अनुमंडल पदाधिकारी ने विपश्यना केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। अपर मुख्य सचिव ने दोनों प्रस्तावों पर सहमति जताते हुए उन्हें मास्टर प्लान में शामिल करने के निर्देश दिए।

मोतिहारी वन प्रमंडल पदाधिकारी ने बताया कि सरोत्तर झील में ईको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। इस पर अपर मुख्य सचिव ने झील क्षेत्र में बोटिंग, कैफेटेरिया, पार्क और अन्य पर्यटन सुविधाओं के विकास का खाका तैयार करने को कहा। विभाग के ईको-टूरिज्म निर्माण सलाहकार को सभी सुझावों और प्रस्तावों को समाहित करते हुए विस्तृत प्रतिवेदन शीघ्र तैयार कर विभाग को सौंपने का निर्देश दिया गया, ताकि स्वीकृति के बाद विकास कार्यों की शुरुआत जल्द की जा सके। मौके पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षण पुरातत्त्वविद् हरि ओम शरण, मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, मोतिहारी वन प्रमंडल पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।