कोइरी को ताज भूमिहार-यादव संग जदयू का राज, विरोधियों को भाजपा-जदयू ने दिया सबसे बड़ा जातीय झटका

सम्राट चौधरी, विजय चौधरी और विजेंद्र यादव के सहारे बिहार में एनडीए ने जातीय समीकरणों का एक अनोखा प्रयोग भी किया है जो कई विरोधियों को मात देने वाली रणनीति है.

Samrat Chaudhary- फोटो : news4nation

Bihar Politics :  बिहार में भाजपा की सरकार बन चुकी है. पहली बार राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा के पास गई और सम्राट चौधरी को सीएम पद की बुधवार को शपथ दिलाई गई. वहीं मंत्रिमंडल में जदयू कोटे से दो वरीय नेताओं विजय चौधरी और विजेंद्र यादव को शपथ दिलाई गई जो अब उप मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे. तीनों नेताओं के लिए यह पहला मौका है जब वे सत्ता की शीर्ष कुर्सी पर आये हैं. हालांकि एनडीए का इन तीनों को सीएम और डिप्टी सीएम बनाना एक बड़ी रणनीति का हिस्सा भी जिसके सहारे जातियों को साधना और विरोधियों को मात देना भी शामिल है. माना जा रहा है कि अब आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण विभाग भी जदयू अपने पाले में रखने के लिए भाजपा पर दबाव बनाएगी. 


नई सरकार के मुखिया यानी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं जो जाति से कोयरी (कुशवाहा) हैं. वहीं उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी भूमिहार हैं जबकि यादव बिरादरी से विजेंद्र यादव हैं. यह बिहार के जातीय और सियासी समीकरणों में बेहद खास रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. दरअसल, अब तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे जो कुर्मी जाति से आते हैं. वहीं नीतीश कुमार का कोर वोट बैंक भी लव-कुश समीकरण यानी कुर्मी-कोयरी का रहा है. ऐसे में सम्राट को मुख्यमंत्री बनाने से लव-कुश का मजबूत गठजोड़ एनडीए के साथ बरकरार रह सकता है. बिहार जाति आधारित गणना 2023 के अनुसार, बिहार में कुर्मी आबादी लगभग 2.87% और कोयरी (कुशवाहा) आबादी लगभग 4.21% है. 


भूमिहार से नाराजगी नहीं 

इसी तरह एनडीए के लिए बिहार में सबसे मजबूत जनाधार वाला जातीय वर्ग भूमिहार रहा है. भाजपा से विजय कुमार सिन्हा अब तक उप मुख्यमंत्री थे. लेकिन 14 अप्रैल को जब सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुना गया उसके बाद विजय सिन्हा ने कहा कि हमने अपने कमांडर के आदेश का पालन किया है. इससे साफ हो गया कि विजय सिन्हा सहित भाजपा के कई नेता सम्राट की ताजपोशी से नाखुश हैं. वहीं विजय सिन्हा के बयान से भूमिहार वर्ग में भी एनडीए को लेकर नाराजगी मानी गई. ऐसे में अब जदयू के विजय चौधरी को उप मुख्यमंत्री बनाकर उस नाराजगी को पाटने की कोशिश भी की गई है. साथ ही नीतीश ने अपने सबसे भरोसेमंद को डिप्टी सीएम बनवाकर एक खास रणनीति बनाइ है. 


विजेंद्र यादव क्यों अहम 

बिहार के जातीय समीकरणों में यादव सबसे बड़ा वर्ग है. बिहार में 2023 में जारी की गई जाति आधारित गणना  की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, यादव समुदाय की आबादी 14.26% है. इस वर्ग को लालू यादव का सबसे मजबूत समर्थक माना जाता है. वहीं नीतीश ने विजेंद्र यादव को उप मुख्यमंत्री बनाकर एक साथ कई समीकरणों को साधा है. एक ओर उन्होंने यादव वर्ग को साफ संदेश दिया है कि अब तक लालू यादव सभी महत्वपूर्ण पद अपने परिवार के लोगों को देते हैं जबकि नीतीश ने एक यादव को डिप्टी सीएम बनाया है. इसी तरह यादव जाति के लिए संदेश दिया कि आपके जाति के शीर्ष नेता को हमने सबसे बड़ी कुर्सी दी. इसका दूरगामी असर जदयू अपने फायदे के लिए ले सकती है. 


कौन हैं विजय चौधरी

विजय चौधरी का जन्म 8 जनवरी 1957 को समस्तीपुर जिले में हुआ,   राजनीतिक विरासत अपने पिता जगदीश प्रसाद चौधरी से मिली, जो खुद एक प्रभावशाली राजनीतिक शख्सियत थे। भूमिहार जाति से आने वे विजय चौधरी ने Patna University से इतिहास में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद कुछ समय तक State Bank of India में नौकरी भी की, लेकिन पारिवारिक पृष्ठभूमि और राजनीति के प्रति झुकाव ने इन्हें सार्वजनिक जीवन की ओर खींच लिया।


 पिता के निधन के बाद इन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और दलसिंहसराय विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर अपनी पहचान बनाई। लगातार तीन बार विधायक चुने जाने गए। शुरुआती दौर में ये कांग्रेस से जुड़े रहे, लेकिन 2005 में जेडीयू में शामिल होने का फैसला इनके करियर का बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। पार्टी के प्रवक्ता से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक की जिम्मेदारी संभाली। 2010 में सरायरंजन सीट से जीत दर्ज कर इन्होंने अपनी पकड़ और मजबूत की। वे लगातार चुनाव जीत रहे हैं। इनकी प्रशासनिक छवि साफ-सुथरी और संतुलित मानी जाती है। बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar के करीबी सहयोगियों में इनकी गिनती होती रही है। अब राज्य की नई सियासी परिस्थितियों में इन्हें उप मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली है, जिससे उनकी राजनीतिक भूमिका और भी अहम हो गई है।


कौन हैं विजेंद्र यादव

कोसी क्षेत्र की राजनीति में ‘चाणक्य’ के नाम से पहचाने जाने वाले विजेंद्र प्रसाद यादव 79 वर्ष की उम्र में भी सक्रिय और प्रभावशाली नेता बने हुए हैं। साल 1990 से लगातार चुनाव जीतते आ रहे यादव ने अपने लंबे राजनीतिक करियर में मजबूत जनाधार और प्रशासनिक पकड़ का प्रदर्शन किया है। वे शुरुआती दौर से ही बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar के करीबी सहयोगी रहे हैं और उनकी टीम के अहम रणनीतिकारों में गिने जाते हैं। सुपौल विधानसभा के लिए विजेंद्र यादव का नाम पर्याय बन चुका है


कोसी इलाके में उनकी पहचान एक विकासवादी नेता के रूप में स्थापित है। सुपौल, सहरसा और मधेपुरा जैसे जिलों में बिजली ढांचे को मजबूत करने के लिए उन्होंने ग्रिड नेटवर्क का विस्तार कराया और नए पावर सब-स्टेशनों की स्थापना कराई। इसके परिणामस्वरूप कभी अंधेरे में डूबा रहने वाला कोसी क्षेत्र आज ऊर्जा के मामले में काफी सशक्त हुआ है।