Magahi Mahotsav 2026: मगही महोत्सव 2.0 की वार्षिक पत्रिका का लोकार्पण, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने मगध भवन निर्माण के लिए पहल का दिया भरोसा
Magahi Mahotsav 2026: मगध की प्राचीन लोकभाषा मगही के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार को समर्पित ‘मगही महोत्सव 2.0 (2026)’ की वार्षिक पत्रिका का लोकार्पण विधानसभा अध्यक्ष सभाकक्ष, पटना में गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ।...
Magahi Mahotsav 2026: मगध की प्राचीन लोकभाषा मगही के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार को समर्पित ‘मगही महोत्सव 2.0 (2026)’ की वार्षिक पत्रिका का लोकार्पण शनिवार शाम बिहार विधानसभा अध्यक्ष सभाकक्ष, पटना में गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने विधिवत पत्रिका का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मगही भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, कलाकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों तथा गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय मौजूदगी रही।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मगध की समृद्ध भाषायी और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा मगही को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानजनक पहचान दिलाने के अभियान को मजबूती प्रदान करना रहा।
मगध भवन के निर्माण के लिए सरकार से करेंगे पहल
पत्रिका लोकार्पण के बाद अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने मगही भाषा की ऐतिहासिक गरिमा, लोक साहित्य और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए मगध भवन के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस दिशा में सरकार के समक्ष पहल की जाएगी।उन्होंने कहा कि मगही महज बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि मगध की आत्मा, अस्मिता और जनजीवन की सशक्त अभिव्यक्ति है। इस भाषा में यहां की सभ्यता, परंपरा, लोकजीवन, सामाजिक सरोकार और सांस्कृतिक चेतना की झलक मिलती है। लिहाजा मगही के प्रति लोगों में गर्व का भाव पैदा करना और इसके साहित्यिक, शैक्षिक तथा लिखित स्वरूप को व्यापक विस्तार देना वक्त की जरूरत है।डॉ. कुमार ने लोकार्पित वार्षिक पत्रिका को मगही भाषियों के लिए उपयोगी दस्तावेज बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास भाषा की विरासत को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। मगही को संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग और इसके व्यापक विकास का सवाल भी लंबे समय से भाषा प्रेमियों के विमर्श का हिस्सा रहा है।
नई पीढ़ी को मगही से जोड़ने की पहल
आयोजन समिति की ओर से उज्ज्वल कुमार, विजेता चंदेल और रविशंकर उपाध्याय ने बताया कि वार्षिक पत्रिका मगही भाषा और संस्कृति से जुड़े विविध पहलुओं को एक मंच पर संकलित करने का सार्थक प्रयास है। इसके जरिए मगही साहित्य, इतिहास, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को दस्तावेजी रूप देने की कोशिश की गई है।उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को अपनी मातृभाषा और जड़ों से जोड़ना इस पहल का प्रमुख मकसद है। पत्रिका के माध्यम से मगही के प्रति युवाओं की दिलचस्पी बढ़ाने, रचनात्मक लेखन को प्रोत्साहित करने और भाषा के प्रचार-प्रसार को नई रफ्तार देने का प्रयास किया जा रहा है।
साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने रखे विचार
कार्यक्रम में मगध के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सत्यजीत सिंह, शिक्षाविद् डॉ. नीरज अग्रवाल, फिल्मकार नीतीन चंद्रा, व्यवसायी राहुल कुमार, गया घराने के गायक पंडित सतीश शर्मा, मुकेश सिंह समेत कई गणमान्य लोगों ने शिरकत की। उपस्थित अतिथियों ने मगही भाषा, साहित्य, लोक संस्कृति और मगध की ऐतिहासिक विरासत पर अपने विचार साझा किए।वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा और सांस्कृतिक जड़ों से होती है। मातृभाषा का संरक्षण केवल साहित्यकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी भाषायी पहचान पर गर्व करने और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक होने का अवसर देते हैं।अतिथियों ने मगही महोत्सव आयोजन समिति की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से भाषा के प्रति जन-जुड़ाव बढ़ेगा और मगही को व्यापक मंच मिलेगा।
मगही के उत्थान का संकल्प दोहराया
कार्यक्रम के समापन पर मगही महोत्सव आयोजन समिति, पटना की ओर से सभी अतिथियों, लेखकों, सहयोगियों और मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार प्रकट किया गया। समिति ने संकल्प दोहराया कि मगही भाषा, साहित्य, लोककला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भविष्य में भी निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।मगही महोत्सव 2.0 की यह पहल इस बात का संदेश देती है कि अपनी मातृभाषा को सहेजना केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी पहचान और विरासत को सुरक्षित रखना भी है।