निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई: रिश्वतखोरी मामले में पूर्व कंपनी कमांडर को 3 साल की सजा
Patna : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को बड़ी सफलता मिली है। विशेष न्यायालय निगरानी, पटना के न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने गृह रक्षा वाहिनी, आरा (भोजपुर) के तत्कालीन कंपनी कमांडर रामा प्रजापति को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। यह फैसला निगरानी थाना कांड संख्या-07/2011 (विशेष वाद सं-04/2011) में 1 सितंबर 2026 को सुनाया गया।
ड्यूटी लगाने के एवज में मांगी थी 4 हजार रुपये की रिश्वत
यह मामला वर्ष 2011 का है, जब भोजपुर जिले के पावना थाना अंतर्गत काकड़डिहरा गांव निवासी गृह रक्षक जय बहादुर सिंह ने निगरानी में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि कंपनी कमांडर रामा प्रजापति दो गृह रक्षकों की ड्यूटी लगाने के एवज में प्रति जवान 2,000 रुपये के हिसाब से कुल 4,000 रुपये रिश्वत मांग रहे हैं। निगरानी ब्यूरो द्वारा शिकायत का सत्यापन सही पाए जाने के बाद 3 फरवरी 2011 को आरोपी को 4,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था।
दोनों धाराओं में 3-3 साल की सजा और अर्थदंड
मामले में पुलिस निरीक्षक महेश कुमार द्वारा समय पर आरोप-पत्र दाखिल किया गया और प्रभारी विशेष लोक अभियोजक किशोर कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी की। अदालत ने आरोपी रामा प्रजापति को धारा 7 के तहत 3 वर्ष सश्रम कारावास व 5,000 रुपये अर्थदंड तथा धारा 13(2) सह पठित 13(1)(डी) के तहत 3 वर्ष सश्रम कारावास व 5,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर दो महीने का साधारण कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
वर्ष 2026 में अब तक 19 मामलों में हो चुकी है सजा
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक न्यायालय द्वारा कुल 19 भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है। इससे पूर्व वर्ष 2025 में कुल 30 मामलों में विशेष न्यायालय द्वारा सजा सुनाई गई थी। वर्ष 2000 से 2024 के आंकड़ों की तुलना में हाल के वर्षों में भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने की दर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने के लिए अभियोजन में तेजी
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य केवल प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी करना ही नहीं, बल्कि न्यायालय से बेहतर समन्वय स्थापित कर अभियुक्तों को कड़ी सजा दिलाना है। ब्यूरो द्वारा सभी लंबित मामलों में गवाहों की समय पर गवाही कराकर अभियोजन की कार्रवाई को लगातार गति दी जा रही है ताकि सरकारी तंत्र को पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जा सके।
रंजीत की रिपोर्ट