Bihar News : मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना में धांधली पर बड़ी कार्रवाई, घटिया सड़क निर्माण के दोषी संवेदक 3 साल के लिए किये गए 'ब्लैकलिस्ट'

PATNA : बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग ने निर्माण कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार बरतने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। छपरा-01 कार्य प्रमंडल के अंतर्गत मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद विभाग ने संबंधित संवेदक को अगले तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। विभाग की इस कार्रवाई से सरकारी योजनाओं में बंदरबांट करने वाले ठेकेदारों के बीच हड़कंप मच गया है।

मामला छपरा की दो प्रमुख सड़क परियोजनाओं से जुड़ा है, जिनमें 'पेरारी से हरिजन टोला चमरहिया' और 'नंदलाल सिंह कॉलेज से हरिजन टोला बेलदारी' तक सड़कों का निर्माण किया जा रहा था। विभागीय जांच में यह बात सामने आई कि इन सड़कों का निर्माण कार्य तय एस्टीमेट के अनुरूप नहीं था। जांच दल ने पाया कि ठेकेदार द्वारा गुणवत्ता के मानकों का घोर उल्लंघन किया गया है, जिससे सड़क की मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।

निर्माण में अनियमितता सामने आने के बाद विभाग ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए संवेदक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। विभाग ने सभी साक्ष्यों के साथ संवेदक से स्पष्टीकरण मांगा था कि क्यों न उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए। हालांकि, निर्धारित समय-सीमा के भीतर संवेदक की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, जिसे विभाग ने अपनी गलती स्वीकार करने और जांच रिपोर्ट की पुष्टि के तौर पर देखा।

संवेदक के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को देखते हुए ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंता प्रमुख ने बिहार ठीकेदारी निबंधन नियमावली, 2007 की प्रासंगिक धाराओं के तहत सकारण आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत उक्त संवेदक को तत्काल प्रभाव से तीन वर्षों के लिए विभाग के किसी भी कार्य में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार ग्रामीण इलाकों में बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग द्वारा निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी की जा रही है। इस कार्रवाई के जरिए विभाग ने अन्य संवेदकों को भी कड़ा संदेश दिया है कि यदि मानकों के साथ समझौता किया गया, तो विभाग कठोर कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।