'भाजपा है जनादेश चोर-जदयू को खत्म करने की है तयारी', दो निर्दलीय एमएलसी को बीजेपी में शामिल कराने पर भड़के मनोज झा

मनोज झा ने कहा कि बिहार की जनता और हर जाति-समुदाय ने चुनाव में अपना संदेश दिया है। तमाम तंत्र-मंत्र के बावजूद भाजपा महज दो सीटें जीत पाई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की जल्दबाजी जदयू को कमजोर और खत्म करने की है।

ManoManoj Jha Slams BJPj Jha- फोटो : news4nation

Bihar News :  बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद दो नवनिर्वाचित निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने की खबरों को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। राजद सांसद मनोज झा ने रविवार को इस घटनाक्रम पर कड़ी नाराजगी जताते हुए भाजपा पर जनादेश की चोरी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने एक दिन पहले दो निर्दलीय उम्मीदवारों को पार्टी में शामिल कराया और अब दिल्ली में बड़ी रैली हो रही है। मनोज झा ने सवाल उठाया कि आखिर चुनाव जीतने के तुरंत बाद निर्दलीय विधान पार्षदों को किसी दल में शामिल कराने की इतनी जल्दबाजी क्यों है?


मनोज झा ने कहा कि बिहार की जनता और हर जाति-समुदाय ने चुनाव में अपना संदेश दिया है। तमाम तंत्र-मंत्र के बावजूद भाजपा महज दो सीटें जीत पाई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की जल्दबाजी जदयू को कमजोर और खत्म करने की है। भाजपा के लोग यह भी नहीं समझ रहे कि कोई निर्दलीय सदस्य किसी दल को समर्थन तो दे सकता है, लेकिन दल की सदस्यता ग्रहण नहीं कर सकता।


दोनों नवनिर्वाचित MLC को अयोग्य घोषित करने की मांग

मनोज झा ने कहा कि राजद इस मामले को लेकर चुनाव आयोग और बिहार विधान परिषद के सभापति के पास शिकायत करेगा। उन्होंने सभापति से दोनों नवनिर्वाचित निर्दलीय विधान पार्षदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि नियमों के मुताबिक, निर्दलीय सदस्य अगर किसी राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण करता है तो उसकी विधान परिषद की सदस्यता जा सकती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सभापति इस मामले में कोई फैसला नहीं लेते हैं तो बड़ा विवाद खड़ा होगा। मुख्यमंत्री अगर इस बेईमानी को चलने देते हैं तो जनता की अदालत में इसका फैसला होगा। मनोज झा ने कहा, "हमने वोट चोरी के बारे में सुना था, लेकिन यह तो मैंडेट चोरी है।"


पहले सदस्यता ली, फिर पलट गए बंशीधर  

इस पूरे विवाद के केंद्र में तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले बंशीधर ब्रजवासी भी हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद उनके भाजपा को समर्थन देने और पार्टी में शामिल होने की खबर सामने आई थी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वे केवल मुख्यमंत्री से मिलने गए थे। इस तरह भाजपा की सदस्यता लेने की चर्चा के बीच बंशीधर ब्रजवासी के पलटने से मामला और दिलचस्प हो गया है। 


कौन हैं बंशीधर ब्रजवासी?

बंशीधर ब्रजवासी मिथिला विश्वविद्यालय से परास्नातक हैं। उनका राजनीतिक सफर 2005 में शिक्षामित्र बनने के साथ शुरू हुआ। अपने गांव के स्कूल में बहाली के बाद उन्होंने शिक्षामित्रों की 11 महीने की सेवा को पूर्णकालिक कराने के आंदोलन की अगुवाई की। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षक संघ का गठन कर शिक्षकों के अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। 2006 में अनशन से शुरू हुआ उनका आंदोलन लगातार आगे बढ़ता रहा। जुलाई 2024 में शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव केके पाठक से टकराव के बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया था। इसके बाद नवंबर 2024 में तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के उपचुनाव में उन्होंने अपनी दावेदारी पेश की और जीत हासिल की। इस बार फिर चुनाव जीतकर वे विधान परिषद के पूर्णकालिक सदस्य बने हैं।


राहुल राज के भाजपा में जाने पर भी सवाल

दूसरी ओर, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय जीत हासिल करने वाले राहुल राज के भाजपा में शामिल होने की भी चर्चा है। राहुल राज के पहले से भाजपा से संबंध रहे हैं और अब उनके पार्टी में लौटने की बात कही जा रही है। हालांकि, अगर वे निर्दलीय निर्वाचित होने के बाद भाजपा की औपचारिक सदस्यता ग्रहण करते हैं तो उनकी विधान परिषद की सदस्यता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।


बिहार की आठ विधान परिषद सीटों के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत के बाद अब उनका राजनीतिक रुख राज्य की सियासत का नया मुद्दा बन गया है। एक तरफ भाजपा इन नवनिर्वाचित सदस्यों के समर्थन को अपनी राजनीतिक ताकत के तौर पर देख रही है, वहीं राजद इसे जनादेश के साथ खिलवाड़ बता रहा है। साथ ही यह एनडीए में भी टकराव को बढ़ा रहा है।  बंशीधर और राहुल दोनों ने जदयू उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की लेकिन अब दोनों भाजपा में शामिल हो रहे हैं तो इससे जदयू में गहरी नाराजगी बताई जा रही है।  जदयू के प्रत्याशी रहे अभिषेक झा और पुष्कर आनंद पहले ही भाजपा नेताओं पर धोखा देने का कथित आरोप लगा चुके हैं।  अब निगाहें विधान परिषद के सभापति और चुनाव आयोग पर टिकी हैं कि इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है।