Patna HighCourt : पटना हाईकोर्ट का अहम् फैसला, केवल गंभीर चोट 'हत्या का प्रयास' नहीं, मंशा सिद्ध होना जरूरी; 90 वर्षीय बुजुर्ग को मिली राहत
Patna HighCourt : अटेम्प्ट मर्डर को लेकर पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा की केवल गंभीर चोट 'हत्या का प्रयास' नहीं, बल्कि मंशा सिद्ध होना जरूरी है......पढ़िए आगे
PATNA : पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि केवल गंभीर चोट लगना ही हत्या के प्रयास का आधार नहीं हो सकता, जब तक अभियुक्त की मृत्यु कारित करने की स्पष्ट मंशा सिद्ध न हो। जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की एकलपीठ ने 21 वर्षों तक चले मुकदमे और अभियुक्त की वृद्धावस्था को ध्यान में रखते हुए सजा को पहले से भुगती गई अवधि तक सीमित करना उचित बताया।
ये मामला वर्ष 2005 का है। जहानाबाद जिले के हुलासगंज थाना कांड संख्या-67/2005 में अभियुक्त अखिलेश प्रसाद पर आरोप था कि उसने किराया विवाद को लेकर सूचक भर्तेश्वर प्रसाद पर फरसा से हमला कर दिया था। 20 मार्च ,2005 की रात घर के बाहर हुए विवाद के दौरान अभियुक्त द्वारा एक ही वार किए जाने की बात सामने आई। इस मामले में सत्र न्यायालय, जहानाबाद ने वर्ष 2009 में अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए धारा 307, 341 एवं 447 आईपीसी के तहत सजा सुनाई थी। धारा 307 के तहत सात वर्ष का कठोर कारावास दिया गया था।
हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की पुनर्समीक्षा में पाया कि अभियुक्त द्वारा केवल एक ही वार किया गया और उसे दोहराया नहीं गया। चिकित्सा साक्ष्य में भी चोट को गंभीर तो बताया गया, लेकिन उसे जीवन के लिए खतरनाक नहीं माना गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे तथ्यों में हत्या के प्रयास की धारा लागू नहीं होती। कोर्ट ने इस आधार पर धारा 307 की सजा को बदलकर धारा 324 (धारदार हथियार से चोट) में परिवर्तित कर दिया। कोर्ट ने सजा निर्धारण के मानवीय पहलुओं पर विशेष जोर दिया।
कोर्ट ने माना कि घटना 2005 की है और सजायफ़्ता 90 वर्ष का वृद्ध और प्रथम अपराधी है। एक वर्ष से अधिक की न्यायिक हिरासत पहले ही भुगत चुका है। इन परिस्थितियों में कोर्ट ने सजा को पहले से भुगती गई अवधि तक सीमित कर दिया।