ज्वेलरी दुकानों में नकाब पर 'No Entry' के आह्वान पर अल्पसंख्यक आयोग सख्त ; पटना DM और SSP से कार्रवाई की मांग
बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने ऑल इंडिया ज्वेलर्स एवं गोल्ड फेडरेशन (AIJGF) की बिहार इकाई द्वारा ज्वेलरी दुकानों में बुर्का और नकाब पहनकर आने वाली महिलाओं के प्रवेश पर रोक (No Entry) लगाने के फैसले पर कड़ा रुख अपनाया है।
Patna : बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने 'ऑल इंडिया ज्वेलर्स एवं गोल्ड फेडरेशन' (AIJGF) की बिहार इकाई द्वारा ज्वेलरी की दुकानों में बुर्का या नकाब पहनकर आने वाली महिलाओं के प्रवेश पर रोक (No Entry) लगाने के निर्णय पर कड़ा संज्ञान लिया है । आयोग ने इस कदम को असंवैधानिक और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बताते हुए पटना के जिला पदाधिकारी (DM) और वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को पत्र लिखकर विधि सम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है ।
संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
अल्पसंख्यक आयोग द्वारा जारी पत्र (संचिका संख्या- 115/2026/53) में कहा गया है कि AIJGF के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा का यह आह्वान संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) और अनुच्छेद 21 द्वारा संरक्षित अधिकारों के विपरीत है । आयोग का मानना है कि सुरक्षा और आत्मरक्षा के नाम पर विशेष धर्म की महिलाओं को समाज में अपराधी के रूप में सशंकित करने का यह प्रयास विधि व्यवस्था के दृष्टिकोण से कतई उचित नहीं है ।
सुरक्षा के तर्क पर आयोग का कड़ा सवाल
आयोग ने फेडरेशन के उस तर्क को भी खारिज कर दिया है जिसमें बुर्का पहनकर होने वाली आपराधिक घटनाओं को इस पाबंदी का आधार बताया गया था । आयोग ने सवाल उठाया कि जिस प्रकार बाइक सवार अपराधी हेलमेट पहनकर घटनाओं को अंजाम देते हैं, क्या उसी तर्क पर सुरक्षा के नाम पर हेलमेट पहनकर बाइक चलाने पर प्रतिबंध लगा देना विधि सम्मत होगा? पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अपराधियों में कानून का भय स्थापित करने के बजाय एक विशेष पहनावे को लक्ष्य करना धार्मिक विद्वेष पैदा करने की कोशिश है ।
तनावपूर्ण वातावरण की आशंका
आयोग ने चिंता व्यक्त की है कि इस तरह के बयानों से ज्वेलरी दुकानों के पास से गुजरने वाली महिलाओं के प्रति समाज में शक और नकारात्मक मानसिकता पैदा होगी, जिससे अकारण तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो सकती है । यह स्थिति राज्य की विधि व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती साबित हो सकती है ।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपील
अल्पसंख्यक आयोग के प्रभारी पदाधिकारी ने पटना प्रशासन से अनुरोध किया है कि इस मामले के दूरगामी दुष्प्रभावों को देखते हुए तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए और की गई कार्रवाई से आयोग को अवगत कराया जाए ।