Bihar MLC Election: MLC चुनाव में खुलासों की बरसात, पवन सिंह ने शपथ पत्र में ज्योति सिंह को बताया पत्नी, सबसे अमीर निकले राजद के सुनील सिंह, नीतीश के पुत्र ने नहीं पूरी की है इंजीनियरिंग की पढ़ाई

Bihar MLC Election: तलाक का मामला अदालत में लंबित होने के बावजूद पवन सिंह ने अपने शपथ पत्र में ज्योति सिंह को अपनी पत्नी के रूप में दर्ज किया है।

नेताओं की दौलत और पारिवारिक कहानी- फोटो : social Media

Bihar MLC Election: बिहार की सियासत इन दिनों विधान परिषद चुनाव को लेकर पूरी तरह गर्म है। परिषद की 10 सीटों, जिनमें एक उपचुनाव की सीट भी शामिल है, के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सत्तारूढ़ एनडीए के सभी 9 उम्मीदवारों और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एकमात्र प्रत्याशी ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इसके साथ ही उम्मीदवारों के शपथ पत्रों में दर्ज संपत्ति, पारिवारिक स्थिति और शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी नई चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।सबसे ज्यादा सुर्खियां भाजपा प्रत्याशी और भोजपुरी फिल्म अभिनेता पवन सिंह के हलफनामे ने बटोरी हैं। दिलचस्प बात यह है कि तलाक का मामला अदालत में लंबित होने के बावजूद उन्होंने अपने शपथ पत्र में ज्योति सिंह को अपनी पत्नी के रूप में दर्ज किया है। यानी कानूनी दस्तावेजों में अब भी दोनों का रिश्ता बरकरार माना जा रहा है।

उधर भाजपा उम्मीदवार पवन सिंह की संपत्ति में भी दो वर्षों के भीतर उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान जहां उन्होंने 16.74 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी, वहीं अब यह बढ़कर 19.44 करोड़ रुपये हो गई है। उनके पास 3.82 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की पांच लग्जरी गाड़ियां हैं, जिनमें 2.68 करोड़ रुपये की टोयोटा लैंड क्रूजर भी शामिल है।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की शैक्षणिक योग्यता भी चर्चा का विषय बनी हुई है। चुनावी दस्तावेजों के मुताबिक उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी नहीं की है और आठ में से केवल पांच सेमेस्टर ही पूरे किए हैं।

अगर दौलत के लिहाज से उम्मीदवारों का हिसाब-किताब देखा जाए तो राजद के सुनील कुमार सिंह सबसे आगे नजर आते हैं। उनके पास लगभग 54 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है। उनकी पत्नी के पास करीब ढाई किलोग्राम सोना और 35 किलोग्राम चांदी के आभूषण दर्ज हैं, जिसने राजनीतिक गलियारों में खास चर्चा पैदा कर दी है। शपथ पत्रों के इन आंकड़ों ने चुनावी मैदान में नई बहस और सियासी चर्चाओं को जन्म दे दिया है।