पटना के इस इलाके में बंदरों का आतंक : तीन महीने से सहमे ग्रामीण, महिलाओं और बच्चों का घर से निकलना दुश्वार

पटना के नौबतपुर प्रखंड के गोनवां इलाके में पिछले तीन महीने में तकरीबन 5 सौ बंदरों ने आतंक मचा रखा है। सुबह होते ही यह झुंड पूरे गांव में उत्पात मचाने निकल पड़ता है। छतों और आंगनों पर खुलेआम घूमने वाले ये बंदर लोगों को काफी परेशान कर रहे है....

नौबतपुर में बंदरों का आतंक- फोटो : सुमित कुमार

Patna : जिले के नौबतपुर प्रखंड अंतर्गत गोनवां और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पिछले तीन महीनों से बंदरों का भयंकर आतंक कायम है। लगभग 500 से अधिक बंदरों के विशाल झुंड ने पूरे क्षेत्र को अपने कब्जे में ले लिया है। अचानक बढ़ी इस संख्या के कारण गांव की शांति पूरी तरह भंग हो चुकी है और स्थानीय लोग हर पल भय तथा अनहोनी के साए में जीने को मजबूर हैं।


कब्रिस्तान के पीपल पेड़ और बगीचे को बनाया अपना मुख्य अड्डा

ग्रामीणों के अनुसार, बंदरों के इस विशाल गिरोह ने गोनवां गांव के समीप स्थित कब्रिस्तान के पुराने पीपल के पेड़ और नजदीकी बगीचे को अपना स्थायी ठिकाना बना रखा है। सुबह होते ही यह झुंड पूरे गांव में उत्पात मचाने निकल पड़ता है। छतों और आंगनों पर खुलेआम घूमने वाले ये बंदर रसोई के बर्तन, अनाज, कपड़े और राहगीरों के हाथों से मोबाइल फोन तक छीनकर रफूचक्कर हो रहे हैं।


विरोध करने पर हमलावर हो रहे बंदर, कई ग्रामीण काटकर किए घायल

स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि बंदरों को भगाने या सामान बचाने की कोशिश करने पर वे आक्रामक होकर हमला कर देते हैं। बीते तीन महीनों में कई लोग इनके काटने से लहूलुहान और घायल हो चुके हैं। बंदरों के खौफ से बुजुर्गों, बच्चों और आम लोगों का अपने ही घरों से बाहर निकलना और छतों पर जाना पूरी तरह से दूभर हो चुका है।


महिलाओं और बच्चियों पर झपटने से घरों में कैद होने को मजबूर ग्रामीण महिलाएं

मामले का सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा है। आंगन या छत पर काम कर रही महिलाओं और बच्चियों पर बंदर अचानक हमला बोल देते हैं और कपड़े खींचकर उन्हें नुकसान पहुँचाते हैं। इस असुरक्षा और लोक-लाज के भय से गांव की महिलाओं ने छतों पर जाना बंद कर दिया है और वे अपने ही घरों में सिमट कर रहने को विवश हैं।


वन विभाग से बंदरों को पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोड़ने की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में केवल कुछ ही बंदर दिखे थे, लेकिन देखते ही देखते इनकी तादाद सैकड़ों में पहुँच गई। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से गुहार लगाई है कि इन सभी 500 बंदरों को जल्द से जल्द रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगलों में छोड़ा जाए। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भी विस्फोटक हो सकती है।


सुमित की रिपोर्ट