Bihar Salary Scam : बिहार में वेतन घोटाले में पुलिस का बड़ा एक्शन, शिक्षक और डाटा ऑपरेटर पर इनाम घोषित, मेकर-चेकर और अप्रूवल अधिकारी भी जांच के घेरे में

Bihar Salary Scam :सरकारी खजाने से फर्जी तरीके से वेतन की रकम निकालने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है।

वेतन घोटाले में पुलिस का बड़ा एक्शन- फोटो : reporter

Bihar Salary Scam: शिक्षा विभाग में करीब 60.57 लाख रुपये के कथित वेतन घोटाले ने सरकारी महकमे में खलबली मचा दी है। सरकारी खजाने से फर्जी तरीके से वेतन की रकम निकालने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है।  मोतिहारी के आरोपी मदरसा शिक्षक और डाटा ऑपरेटर की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने देर रात कई ठिकानों पर छापेमारी की। वहीं, पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी में मददगार सूचना देने के लिए 10-10 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है।

इस मामले में पुलिस की जांच अब केवल दो कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। वेतन भुगतान की पूरी प्रक्रिया में शामिल मेकर, चेकर और अप्रूवल देने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर दो वर्षों से अधिक समय तक फर्जी वेतन भुगतान होता रहा और संबंधित अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?

पत्नी, पिता और बहन के खातों में भेजी गई वेतन की रकम

  मोतिहारी के शिक्षा विभाग में सामने आए इस कथित घोटाले में डीपीओ स्थापना कार्यालय के डाटा ऑपरेटर अमन कुमार और छौड़ादानो के मदरसा शिक्षक मोहम्मद इमादुद्दीन शाबिर का नाम सामने आया है। बताया गया है कि मदरसा शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर विभागीय कार्यों से जुड़ा था।जिला शिक्षा पदाधिकारी के अनुसार, दोनों कर्मियों ने HRMS प्रणाली में कथित छेड़छाड़ कर जून 2024 से सितंबर 2026 तक फर्जी तरीके से वेतन भुगतान कराया। आरोप है कि मृत, दूसरे जिले में स्थानांतरित और सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम पर वेतन की राशि निकालकर पत्नी, पिता और बहन के बैंक खातों में भेजी गई।प्रारंभिक जांच में कुल 60,57,158 रुपये के कथित फर्जी भुगतान का मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

एसपी ने घोषित किया 10-10 हजार रुपये का इनाम

मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मोतिहारी पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान शुरू कर दिया है। पुलिस की टीम ने देर रात कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर अभी आगे की कार्रवाई जारी है।एसपी स्वर्ण प्रभात ने आरोपी डाटा ऑपरेटर अमन कुमार और मदरसा शिक्षक मोहम्मद इमादुद्दीन शाबिर पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। पुलिस दोनों की तलाश में जुटी है।इस मामले में डीपीओ स्थापना की ओर से नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस अब बैंक खातों, HRMS रिकॉर्ड और वेतन भुगतान से जुड़े डिजिटल दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।

मेकर-चेकर और अप्रूवल अधिकारियों पर भी उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल वेतन भुगतान की प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर है। सरकारी व्यवस्था के तहत वेतन भुगतान के लिए मेकर, चेकर और अप्रूवल अधिकारी की अलग-अलग जिम्मेदारियां होती हैं। इसके अलावा डीडीओ, बीईओ और डीपीओ स्थापना स्तर पर भी भुगतान से संबंधित प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि HRMS के माध्यम से लगातार फर्जी भुगतान हो रहा था, तो संबंधित अधिकारियों ने इसकी जांच क्यों नहीं की? क्या भुगतान से पहले दस्तावेजों और बैंक खातों का सत्यापन नहीं किया गया था?पुलिस अब वर्ष 2024 से लेकर सितंबर 2026 तक हुए संदिग्ध वेतन भुगतानों की जांच का दायरा बढ़ा रही है। मेकर, चेकर और अप्रूवल देने वाले पदाधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

डीएम ने भी दिए कार्रवाई के निर्देश

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने फर्जी वेतन भुगतान में शामिल पाए जाने वाले मेकर, चेकर और अप्रूवल अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का निर्देश दिया है।वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी और डीपीओ स्थापना की ओर से दोनों आरोपी कर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि फर्जी भुगतान की रकम किन-किन खातों में गई और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

दोहरा वेतन उठाने के आरोपों की भी चर्चा

मोतिहारी के शिक्षा विभाग में इस घोटाले के सामने आने के बाद एक और गंभीर आरोप चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि जिले में कुछ शिक्षकों ने नियोजित शिक्षक और विशिष्ट शिक्षक के रूप में एक साथ वेतन उठाया है। स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि शिक्षा विभाग के वेतन भुगतान से जुड़े सभी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि किसी भी स्तर पर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आ सके।

छोटी मछलियों पर कार्रवाई या पूरे सिस्टम की होगी जांच?

60.57 लाख रुपये के कथित घोटाले ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि वेतन भुगतान की प्रक्रिया में कई स्तरों पर अधिकारियों की मंजूरी जरूरी थी, तो इतने लंबे समय तक फर्जीवाड़ा कैसे चलता रहा? क्या यह केवल दो कर्मचारियों की करतूत थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था?फिलहाल पुलिस ने दो आरोपियों को नामजद करते हुए कार्रवाई शुरू की है। लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच की आंच भुगतान को मंजूरी देने वाले अधिकारियों तक पहुंचती है या नहीं। 

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार