पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर 9 मई लगेगा लोक अदालत, ट्रैफिक चालान काटे जाने से सम्बन्धित विवादों का होगा निपटारा
National Lok Adalat : पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर 9 मई, 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत के अंतर्गत पूरे राज्य के जिला और अन्य न्यायालयों में ट्रैफिक चालान काटे जाने से सम्बन्धित विवादों निपटारे के लिए लोक अदालतों का आयोजन किया गया है। पटना हाईकोर्ट ट्राफिक चालान काटने से संबंधित विवादों को लोक अदालत में नहीं ले जाने के मामलें पर गंभीर रुख अपनाया।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने रानी तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ढाई लाख से भी ट्राफिक चालान विवाद लंबित होने पर सख्त नाराजगी जाहिर की थी।
पिछली सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता, बिहार ने कोर्ट बताया था कि बिहार सरकार ने एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना,2026 की अधिसूचना 30 अप्रैल, 2026 को जारी कर दी थी। इसके तहत ट्रैफिक चालान विवाद को प्राथमिकता के तौर पर हल किया जाएगा।छोटे ट्राफिक नियमों के उल्लंघन, जैसे सीट बेल्ट नहीं बांधना,तेज गति वाहन चलाने, पुलिस निर्देशों का उल्लंघन करने, बिना लाइसेन्स गाड़ी चलाने पर जुर्माने की राशि कम कर दी गई है।इन मामलोंकीसुनवाई इन लोक अदालतों द्वारा की जाएगी। शराब पी कर वाहन चलाना, खतरनाक ढंग गाड़ी चलाना, मोबाइल पर बात करते ड्राइविंग करना, ओवर लोडिंग, नाबालिग द्वारा गाड़ी चलाना गंभीर नियम उल्लंघन की श्रेणी में है।
पिछले सुनवाईयों में कोर्ट ने जानना चाहा था कि दूसरे राज्यों की तरह बिहार में चालान विवादों के निपटारे के लिए लोक अदालत का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है। गौरतलब है कि 9 मई, 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जितने भी जिला न्यायालय है ,वहां बड़े पैमाने पर ट्राफिक चालान से संबंधित विवादों का लोक अदालत के माध्यम से निबटारा किया जाए। जो राज्य सरकार वन एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना के तहत कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जितने जिला स्तर के न्यायिक पदाधिकारी है, उन्हें इस ट्राफिक चालान विवाद को प्राथमिकता देते हुए निबटारा करे। ऐसी व्यवस्था हो, जिससे लोग ऑनलाइन राशि जमा कर सके।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि विभिन्न जिला न्यायालयों में 267509 ट्राफिक चालान विवादों से संबंधित मामलें सुनवाई के लिए लंबित हैं। 1 अप्रैल, 2026 से लेकर 16 अप्रैल, 2026 तक 10850 और मामलें आ गए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया था कि विभिन्न राज्यों में ट्रैफिक चालान काटे जाने से सम्बन्धित विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों द्वारा सुनवाई कर सेटलमेंट किया जाता है।
कोर्ट ने इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्रैफिक चालान सम्बन्धी विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों में सुनवाई व निपटारा किया जाता है।कोर्ट ने उड़ीसा का भी उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां ट्रैफिक चालान सम्बन्धी विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों सुलझाया जाता है। कोर्ट ने कहा कि सामान्य कोर्ट पर बोझ कम करने के लिए लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों का गठन किया गया है।कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे मामलों कोपटना हाईकोर्ट ने राज्य में ट्रैफिक चालान काटे जाने से सम्बन्धित विवादों को लोक अदालत में नहीं ले जाने पर सख्त रुख अपनाया था।
कोर्ट ने कहा था कि अगर ऐसे मामलों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों में ले जाया जाये और उनका वहां समाधान हो जाये,तय सामान्य अदालतों पर बोझ भी कम होगा और समय भी बचेगा। लेकिन बिहार में मनमानीविभागों ढंग से चालान काटे जाते हैं। लेकिन इन विवादों के निपटारे के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है ।इससे लोगों को परिवहन विभाग के मनमानी का शिकार होना पड़ता है।
अधिवक्ता विकास पंकज ने कोर्ट को बताया था कि ये मामलें विभाग की निष्क्रियता के कारण बिहार में लोक अदालत में नहीं पहुँच पाते है।जिससे बिहार में लोक अदालतों द्वारा केसों की निष्पादन की संख्या कम होती है। इस मामलें पर अगली सुनवाई 22 जून, 2026 को होगी।