बिहार विधान परिषद में एनडीए हुआ और मजबूत, निशांत और पवन सिंह के एमएलसी बनते ही सदन में बदला शक्ति संतुलन

10 सीटों में भाजपा और जदयू के चार-चार उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। वहीं लोजपा (रामविलास) को एक सीट मिली है। विपक्ष की ओर से राजद का एक उम्मीदवार निर्वाचित हुआ है।

Bihar Legislative Council - फोटो : news4nation

Bihar MLC : बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए हुए चुनाव में सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए हैं। नाम वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद निर्वाचन आयोग ने भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास) और राजद के उम्मीदवारों को विजयी घोषित कर दिया। निर्वाचित सदस्यों को 11 जून को निर्वाचन प्रमाण पत्र भी सौंप दिया गया। इस चुनाव में एनडीए को 10 में से 9 सीटें मिली हैं, जबकि महागठबंधन के खाते में केवल एक सीट गई है।


इन 10 सीटों में भाजपा और जदयू के चार-चार उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। वहीं लोजपा (रामविलास) को एक सीट मिली है। विपक्ष की ओर से राजद का एक उम्मीदवार निर्वाचित हुआ है। चुनाव में मतदान की नौबत ही नहीं आई क्योंकि जितनी सीटें थीं, उतने ही उम्मीदवार मैदान में बचे थे।


इस चुनाव के बाद 75 सदस्यीय बिहार विधान परिषद में एनडीए की स्थिति और मजबूत हो गई है। 75 सीटों में 63 निर्वाचित और 12 राज्यपाल द्वारा मनोनीत सदस्य होते हैं। परिषद में जदयू सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है, जबकि भाजपा दूसरे स्थान पर है। जदयू, भाजपा, लोजपा (रा.), हम और अन्य सहयोगी दलों को मिलाकर सत्तापक्ष को स्पष्ट बहुमत हासिल है। दूसरी ओर राजद, कांग्रेस और वाम दलों समेत विपक्ष की संख्या अपेक्षाकृत काफी कम है।


इस चुनाव की सबसे अधिक चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार और भोजपुरी अभिनेता-गायक पवन सिंह के निर्विरोध निर्वाचन को लेकर रही। दोनों के सदन में पहुंचने से राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नई चर्चाओं को बल मिला है।


विशेषज्ञों का मानना है कि विधान परिषद में मजबूत बहुमत होने से सरकार को विधेयकों को पारित कराने और अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने में सहूलियत मिलेगी। साथ ही यह परिणाम विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के लिए मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है, जबकि विपक्ष के लिए यह अपनी रणनीति की समीक्षा करने का संकेत है।