Bihar Flood: नेपाल की जल प्रलय से उत्तर बिहार पर मंडराया बड़ा खतरा, सिंचाई से सड़क-रेल तक मचेगा संकट

Bihar Flood: नेपाल में आई भीषण जल प्रलय का असर अब उत्तर बिहार के लिए भी चिंता का सबब बनता जा रहा है।

उत्तर बिहार पर मंडराया बड़ा खतरा- फोटो : Hiresh Kumar

Bihar Flood: नेपाल में आई भीषण जल प्रलय का असर अब उत्तर बिहार के लिए भी चिंता का सबब बनता जा रहा है। नेपाल में नदियों के उफान और गाद मिश्रित पानी के तेज बहाव के बाद विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इसका असर बिहार की सिंचाई व्यवस्था, विकास परियोजनाओं, सड़क और रेल नेटवर्क के साथ-साथ पनबिजली परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है। सबसे बड़ी चिंता गंडक, राप्ती और घाघरा जैसी नदियों में भारी मात्रा में गाद जमा होने को लेकर है। नदी का तल ऊपर उठने से आने वाले वर्षों में बाढ़ की विभीषिका और विकराल होने की आशंका जताई जा रही है।

नेपाल में जल प्रलय कोई नई घटना नहीं है, लेकिन इस बार जिस तरह का मंजर सामने आया है, उसे अभूतपूर्व बताया जा रहा है। नेपाल के निचले इलाकों से होते हुए गाद से लबालब पानी जब भारत की ओर आएगा, तो इसका असर गंडक नदी के दोनों किनारों पर बसे इलाकों पर पड़ सकता है। गाद के मैदानों तक पहुंचने से गंडक नदी का तल ऊंचा होने की आशंका है।

इसका सबसे ज्यादा खामियाजा पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जैसे जिलों को भुगतना पड़ सकता है। इन इलाकों की लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि पर हर साल बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। वाल्मीकिनगर और बगहा के आसपास गंडक नदी के उत्तर दिशा में मुड़ने के कारण उत्तर दिशा वाले जिलों पर प्रभाव अधिक पड़ने की आशंका है। वहीं, नदी के दक्षिणी हिस्से में स्थित गोपालगंज और सारण पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ने का अनुमान है।

गाद ने रोका नहरों का पानी

नेपाल के रसुआ जिले में आई बाढ़ के बाद गंडक नदी के पानी में गाद की मात्रा अचानक बढ़ गई। बताया गया कि पानी में तीन पीपीएम तक गाद बढ़ गई थी। यही वजह है कि वाल्मीकिनगर बराज से सारण मुख्य नहर में पानी का बहाव रोकना पड़ा।आशंका थी कि यदि गाद मिश्रित पानी का प्रवाह जारी रहा तो महज एक सप्ताह के भीतर नहर की तलहटी में पांच से छह फीट तक गाद जमा हो सकती है। इससे नहर में पानी का प्रवाह हमेशा के लिए बाधित होने का खतरा पैदा हो सकता था। इसी को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने सारण मुख्य नहर समेत अन्य नहरों में भी फिलहाल पानी का बहाव रोकने का निर्णय लिया।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ का प्रकोप कम होने और गाद के बैठ जाने के बाद नहरों में चरणबद्ध तरीके से दोबारा पानी छोड़े जाने की तैयारी है। हालांकि, लंबे समय तक नहरों में गाद जमा रहने पर खेतों की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

पनबिजली परियोजनाओं पर भी संकट

गंडक नदी में बढ़ी गाद का असर उससे निकलने वाली प्रमुख नहरों तिरहुत, त्रिवेणी और दोन कैनाल पर भी पड़ सकता है। त्रिवेणी नहर से पानी की आपूर्ति प्रभावित होने पर कोतराहा पनबिजली परियोजना की तीनों यूनिटों के संचालन पर संकट आ सकता है। पानी की आपूर्ति बाधित होने पर बिजली उत्पादन ठप होने की आशंका है।

इसी तरह पश्चिमी गंडक नहर पर स्थित सूर्यपुरा पनबिजली घर के सामने भी ऐसी ही चुनौती खड़ी हो सकती है। नहरों में गाद भरने से उनके अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी पहुंचाना मुश्किल हो सकता है, जिसका सीधा असर किसानों की सिंचाई पर पड़ेगा।

सड़क परियोजनाओं पर भी असर की आशंका

नदी में लगातार गाद जमा होने से उसकी धारा की दिशा में बदलाव की आशंका भी जताई जा रही है। नदी की धारा बदलने की स्थिति में बाढ़ और कटाव का दायरा बढ़ सकता है। इसका असर उत्तर बिहार की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है। खास तौर पर गोरखपुर-सिलीगुड़ी सिक्सलेन कॉरिडोर को लेकर चिंता जताई जा रही है।

यानी नेपाल की जल प्रलय का असर सिर्फ मौजूदा बाढ़ तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि गाद और नदी की बदलती धारा आने वाले समय में उत्तर बिहार की खेती, सिंचाई, बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकती है।