जाते-जाते बड़ा 'खेला' कर गए नीतीश: बिहार छोड़ने से पहले सरकारी डॉक्टरों को दिया बड़ा झटका; प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक

बिहार सरकार ने सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब बिहार स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा सेवा के डॉक्टर निजी क्लीनिक नहीं चला पाएंगे। जानें क्या है नया नियम।

Patna -   बिहार की सियासत में 'इस्तीफा और शपथ' के शोर के बीच नीतीश सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने राज्य के हजारों डॉक्टरों की नींद उड़ा दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और राज्य की कमान नए नेतृत्व को सौंपने से ठीक पहले स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध (Complete Ban) लगाने का संकल्प जारी कर दिया है। इसे नीतीश कुमार का जाते-जाते स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की दिशा में आखिरी बड़ा 'हथौड़ा' माना जा रहा है।

विदाई से पहले डॉक्टरों की 'कमाई' पर लगाम

बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक संकल्प के अनुसार, अब सरकारी सेवा में तैनात चिकित्सक निजी तौर पर क्लिनिक नहीं चला सकेंगे। सरकार ने 'सात निश्चय-2' के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए यह कड़ा कदम उठाया है। जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार लंबे समय से सरकारी अस्पतालों की बदहाली और डॉक्टरों के अस्पताल से गायब रहने की शिकायतों से नाराज थे। अब बिहार छोड़ने से पहले उन्होंने इस फाइल पर अंतिम मुहर लगाकर अपनी मंशा साफ कर दी है।

न घर के रहे न घाट के: NPA की तैयारी, लेकिन सख्ती भारी

सरकार ने आदेश में साफ किया है कि डॉक्टरों को प्रैक्टिस छोड़ने के बदले गैर व्यावसायिक भत्ता (NPA) दिया जाएगा। हालांकि, डॉक्टरों के एक बड़े गुट में इस फैसले को लेकर भारी आक्रोश है। डॉक्टरों का तर्क है कि इससे राज्य के स्वास्थ्य ढांचे पर विपरीत असर पड़ सकता है। लेकिन सरकार का आदेश स्पष्ट है—यदि आप सरकारी खजाने से वेतन ले रहे हैं, तो आप निजी दुकान नहीं सजा सकते।

इन संस्थानों के डॉक्टरों पर गिरेगी गाज

यह आदेश सिर्फ जिला अस्पतालों तक सीमित नहीं है। बिहार चिकित्सा शिक्षा सेवा संवर्ग यानी मेडिकल कॉलेजों के बड़े प्रोफेसर और इन्दिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIC) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ डॉक्टर भी अब किसी प्राइवेट नर्सिंग होम में सेवाएं नहीं दे पाएंगे। 15 अप्रैल को नई सरकार के शपथ ग्रहण से पहले आया यह आदेश स्वास्थ्य महकमे में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।