सितम्बर 2026 तक मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं छोड़ेंगे नीतीश कुमार ! एमएलसी पद से देंगे इस्तीफा, फिर ऐसे चलाएंगे सरकार

संविधान के अनुच्छेद 164(4) के कारण नीतीश कुमार के अगले छह महीने तक राज्य के सीएम पद पर बने का लाभ मिल सकता है.

Nitish Kumar- फोटो : news4nation

Nitish Kumar : राज्यसभा चुनाव जीत चुके जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार सितंबर 2026 तक बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। ऐसे में नीतीश कुमार के राज्य के सीएम पद से इस्तीफा देने का मामला अगले छह महीने तक टल सकता है. नीतीश कुमार के लिए यह सुगम स्थिति संविधान के अनुच्छेद 164(4) के कारण हो रही है. ऐसे में बिहार में सीएम पद पर टकटकी लगाए नेताओं को अगले कुछ महीनों तक इंजतार करना पड़ सकता है. 


दरअसल, राज्यसभा सांसद बनने के बाद निर्वाचित सदस्य को अगले निर्वाचन के अगले 14 दिनों के भीतर विधानमंडल की सदस्यता छोडनी होती है. नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव जीते थे. ऐसे में उन्हें अपना एमएलसी पद 30 मार्च को छोड़ना होगा. यही कारण है कि सोमवार, 30 मार्च को सीएम नीतीश के एमएलसी पद से इस्तीफा देने की खबर हैं. लेकिन वे सीएम पद कब छोड़ने वाले हैं इसे लेकर जदयू या नीतीश कुमार की ओर से या फिर एनडीए की ओर से कोई कुछ नहीं बोल रहे हैं. गौरतलब है कि नीतीश कुमार अपनी पार्टी जेडीयू से बिहार विधान परिषद में एमएलसी हैं. जबकि नितिन नवीन पटना की बांकीपुर से सीट से भाजपा के विधायक हैं. दोनों ही नेताओं ने बीते 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी.


सितम्बर तक नीतीश को मोहलत 

राज्यसभा सांसद होने के बाद भी नीतीश कुमार के सितम्बर 2026 तक सीएम पद पद पर बने रहने का लाभ उन्हें संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत मिलेगा. संविधान के अनुच्छेद 164(4) के प्रावधानों में स्पष्ट है कि कोई व्यक्ति अगर राज्य में विधानसभा या विधान मंडल के सदस्य नहीं तो भी वे मुख्यमंत्री या मंत्री बन सकते हैं. लेकिन अगले छह महीने में उन्हें विधायक या एमएलसी बनना होगा. चुकी नीतीश कुमार एमएलसी पद से इस्तीफा देंगे तो उन पर संविधान के अनुच्छेद 164(4) का प्रावधान लागू होगा. वे भी बिना किसी सदन के सदस्य रहे ही छह महीने तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं. ऐसे में नीतीश कुमार के लिए सितम्बर 2026 तक की मोहलत है. यानी में राज्यसभा के सदस्य रहते हुए भी छह महीने तक सीएम बने रह सकते हैं. 


विधानसभा स्पीकर की पुष्टि 

बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने भी पिछले दिनों कहा कि संवैधानिक प्रावधान के तहत कोई व्यक्ति बगैर किसी सदन का सदस्य रहे 6 माह तक मुख्यमंत्री रह सकता है. हालांकि   किसी सदन का सदस्य यदि दूसरे सदन का सदस्य निर्वाचित हो जाता है, तो उसे नियमानुसार 14 दिनों में किसी एक सदन की सदस्यता से इस्तीफा देना होता है. ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए हैं लिहाजा, उन्हें 30 मार्च तक इस्तीफा देना होगा. लेकिन नीतीश कुमार के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी सितम्बर 2026 तक सुरक्षित है. 


सुप्रीम कोर्ट का भी बड़ा फैसला 

बीके कौर बनाम तमिलनाडु राज्य के नाम से सुप्रीम कोर्ट में आए एक मामले में शीर्ष अदालत में बड़ा फैसला सुनाया था. तब जे. जयललिता को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनाया गया था लेकिन उस समय वे विधानसभा की सदस्य नहीं थीं. इतना ही नहीं एक सजा के कारण वे चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य (disqualified) भी थीं. तब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि अनुच्छेद 164(4) का 6 महीने वाला नियम केवल उन लोगों पर लागू होता है जो किसी सदन के सदस्य नहीं हैं, लेकिन सदस्य बनने के लिए “योग्य” (eligible) हैं. अगर कोई व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए ही अयोग्य है, तो वह मुख्यमंत्री या मंत्री नहीं बन सकता, चाहे 6 महीने की छूट क्यों न हो. ऐसे में नीतीश कुमार के साथ इस प्रकार की कोई समस्या भी नहीं है, इसलिए आराम से सितम्बर 2026 तक सीएम बने रह सकते हैं.