Bihar Electricity: रिचार्ज की टेंशन खत्म! स्मार्ट मीटर में आया नया ऑप्शन,बिहार सरकार ने दिया ये विकल्प

Bihar Electricity: सरकार ने स्मार्ट मीटर को लेकर जो नया फ़ैसला लिया है, उसने आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की हवा भी पैदा की है ...

रिचार्ज की टेंशन खत्म! - फोटो : reporter

Bihar Electricity: बिहार की सियासत में बिजली अब सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि एक अहम मुद्दा-ए-बहस बन चुकी है। सरकार ने स्मार्ट मीटर को लेकर जो नया फ़ैसला लिया है, उसने आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की हवा भी पैदा की है और सियासी गलियारों में चर्चा का बाज़ार भी गर्म कर दिया है। अब तक जहां स्मार्ट मीटर को सिर्फ प्रीपेड मोड में चलाना लाज़िमी था, वहीं अब सरकार ने उपभोक्ताओं को यह इख़्तियार दे दिया है कि वे चाहें तो पोस्टपेड या प्रीपेड किसी भी तरीके से बिजली इस्तेमाल करें।

पहले के नियम में उपभोक्ताओं को पहले रिचार्ज करना पड़ता था, तब जाकर बिजली मिलती थी। इसे लेकर जनता में नाराज़गी भी देखने को मिल रही थी। विपक्ष इसे आम आदमी पर आर्थिक बोझ बताकर सरकार को घेर रहा था। ऐसे में यह नया कदम सरकार की तरफ से एक राहत पैकेज की तरह देखा जा रहा है।

हालांकि, विभाग ने साफ कर दिया है कि स्मार्ट मीटर लगवाना हर हाल में अनिवार्य रहेगा। यानी तकनीक से पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं है, लेकिन उसका इस्तेमाल कैसे करना है, यह अब जनता खुद तय करेगी। यह कदम एक तरह से जनता को विकल्प देने की सियासी रणनीति भी माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, मीटर चाहे प्रीपेड हो या पोस्टपेड, बिजली की दरों पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि रेट का फैसला राज्य विद्युत विनियामक आयोग करता है। यानी सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच सरकार ने यह साफ संदेश देने की कोशिश की है कि दरों में कोई हेरफेर नहीं होगा।

प्रीपेड मोड में जहां डिजिटल सुविधाएं जैसे रियल टाइम खपत, ऑनलाइन पेमेंट और सटीक बिलिंग उपभोक्ताओं को टेक्नोलॉजी का फायदा देती हैं, वहीं पोस्टपेड मोड पारंपरिक तरीके से बिल भुगतान की सुविधा देता है। खास बात यह है कि प्रीपेड उपभोक्ताओं को सस्ती दर, बोनस यूनिट और दिन में बिजली इस्तेमाल पर छूट जैसे इंसेंटिव भी मिल सकते हैं।

बहरहाल यह फैसला सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि सियासी संदेश भी है सरकार जनता की पसंद और सहूलियत को नजरअंदाज नहीं कर सकती। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह कदम जनता के बीच कितना लोकप्रिय होता है और सियासत में क्या नया रंग भरता है।