Patna News: पहले कॉमर्शियल टैक्स वसूला, अब सीलिंग का नोटिस! पटना के 27 हजार कारोबारियों में हड़कंप

atna News: पटना नगर निगम की कार्रवाई ने शहर के हजारों कारोबारियों के बीच खलबली मचा दी है। जिन लोगों से नगर निगम लंबे समय से नियमित रूप से कॉमर्शियल टैक्स वसूलता रहा,...

पटना के 27 हजार कारोबारियों में हड़कंप- फोटो : social Media

Patna News: पटना नगर निगम की कार्रवाई ने शहर के हजारों कारोबारियों के बीच खलबली मचा दी है। जिन लोगों से नगर निगम लंबे समय से नियमित रूप से कॉमर्शियल टैक्स वसूलता रहा, अब उन्हीं में से 27 हजार से ज्यादा लोगों को आवासीय इलाके में व्यावसायिक गतिविधि चलाने के आरोप में नोटिस थमा दिया गया है। नोटिस में 24 घंटे के भीतर दस्तावेज या अपना पक्ष रखने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने पर प्रतिष्ठान को अवैध मानते हुए सील या बंद करने की चेतावनी दी गई है।

नगर निगम की इस कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—जब कारोबारियों से कॉमर्शियल टैक्स लिया जा रहा था, तब उनकी व्यावसायिक गतिविधि पर आपत्ति क्यों नहीं जताई गई? अब अचानक वही कारोबार अवैध कैसे हो गया? कारोबारियों का कहना है कि उन्होंने चोरी-छिपे दुकान नहीं चलाई, बल्कि नगर निगम को बाकायदा टैक्स दिया। ऐसे में कार्रवाई का नोटिस उनके लिए किसी झटके से कम नहीं है।

निगम ने अपनी कार्रवाई के पीछे 25 मार्च 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया है। इसी आदेश के अनुपालन में कराए गए सर्वे में सामने आया कि आवासीय क्षेत्रों में करीब 51,082 लोग गैर-आवासीय गतिविधियां चला रहे हैं। इनमें से फिलहाल 27 हजार से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।

नोटिस मिलते ही छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक में बेचैनी है। पुनाईचक निवासी मोहन कुमार का कहना है कि ईमानदारी से टैक्स भरना ही अब उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हो रही है। उनका सवाल है कि अगर आवासीय क्षेत्र में कारोबार की अनुमति नहीं थी तो नगर निगम ने वर्षों तक कॉमर्शियल टैक्स क्यों लिया? उनका कहना है कि कार्रवाई से पहले निगम को ब्याज समेत वसूला गया टैक्स वापस करना चाहिए।

मामला अब सियासी गलियारों में भी पहुंच गया है। पार्षद आशीष सिन्हा ने राज्य सरकार से तत्काल अध्यादेश लाकर नोटिस पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि निगम क्षेत्र में व्यावसायिक इलाकों की स्पष्ट पहचान ही नहीं की गई है। ऐसे में अचानक हजारों कारोबारियों पर कार्रवाई का सीधा असर लाखों लोगों के रोजगार पर पड़ सकता है।

पटना की मेयर सीता साहू ने भी माना कि निगम क्षेत्र में व्यावसायिक इलाके स्पष्ट रूप से चिह्नित नहीं हैं। उनके मुताबिक आम तौर पर व्यावसायिक प्रधान सड़क, व्यावसायिक मुख्य सड़क, आवासीय मुख्य सड़क और आवासीय सहायक सड़क जैसी श्रेणियों के आधार पर क्षेत्र तय किए जाते हैं।

कॉमर्शियल टैक्स लेने के सवाल पर मेयर का कहना है कि नगर निगम के पास ऐसा कोई कानून नहीं है जिसके तहत वह आवासीय इलाके में कारोबार की अनुमति दे। उनका कहना है कि लोग स्वेच्छा से कॉमर्शियल टैक्स देते हैं और निगम उसे स्वीकार करता है।

अब सबसे बड़ा पेच सुप्रीम कोर्ट के आदेश और जमीन पर चल रहे कारोबार के बीच फंस गया है। मेयर के अनुसार पटना नगर निगम क्षेत्र में करीब दो लाख दुकानें हो सकती हैं और व्यापक कार्रवाई से रोजगार प्रभावित होने की आशंका है। इसी मुद्दे पर विचार के लिए 29 अगस्त को स्टैंडिंग कमेटी की बैठक बुलाई गई है।फिलहाल कारोबारियों के सामने 24 घंटे की मोहलत, सीलिंग का खतरा और वर्षों से जमा टैक्स का सवाल खड़ा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन है, दूसरी तरफ उन कारोबारियों की दलील है जिन्होंने नगर निगम के खजाने में नियमित रूप से कॉमर्शियल टैक्स जमा किया। अब निगाहें सरकार और निगम की अगली बैठक पर हैं कि इस ‘टैक्स लिया, अब कार्रवाई’ वाले विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है।