Patna Dengue: पटना में घातक हुआ डेंगू का डंक, एक व्यक्ति की मौत, ये इलाके सबसे घातक, पढ़िए डॉक्टर की सलाह

Patna Dengue: पटना में डेंगू ने अब दस्तक से आगे बढ़कर खतरे की घंटी बजा दी है। ...

पटना में घातक हुआ डेंगू का डंक- फोटो : Hiresh Kumar

Patna Dengue: पटना में डेंगू ने अब दस्तक से आगे बढ़कर खतरे की घंटी बजा दी है। मंगलवार को राजधानी में डेंगू से पहली मौत की बात सामने आई है। मृतक की पहचान 30 वर्षीय इंद्रदेव दास के रूप में हुई है, जो  स्कूल में कर्मचारी थे। वह मूल रूप से झारखंड के सिमडेगा जिले के रहने वाले थे। पिछले पांच दिनों से कुर्जी स्थित एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अभी मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की हैपरिजनों के मुताबिक तबीयत बिगड़ने के बाद इंद्रदेव को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में डेंगू संक्रमण की पुष्टि हुई। इलाज के दौरान उनका प्लेटलेट्स लगातार गिरता गया और हालत नाजुक होती चली गई। चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और मंगलवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।

हालांकि सिविल सर्जन ने बताया कि उन्हें अभी इस मौत की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। सूचना मिलने के बाद मामले की जांच कराई जाएगी और उसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौत की वास्तविक वजह डेंगू थी या कोई अन्य चिकित्सकीय कारण।

राजधानी में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। इस साल पटना में डेंगू मरीजों की संख्या 170 के पार पहुंच गई है। पिछले 24 घंटे में तीन नए मरीज मिलने की जानकारी सामने आई है। सितंबर और अक्टूबर को डेंगू के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में आने वाले दिनों में संक्रमण का दायरा बढ़ने की आशंका ने स्वास्थ्य महकमे की चिंता बढ़ा दी है।स्वास्थ्य विभाग की टीमें बुखार से पीड़ित लोगों की जांच कर रही हैं। फीवर सर्वे चलाया जा रहा है और मरीज मिलने वाले इलाकों में फॉगिंग कराने का दावा किया जा रहा है। मच्छरों के लार्वा को खत्म करने के लिए भी अलग-अलग उपाय किए जा रहे हैं। विभाग ने लोगों से घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने तथा साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की है।

पटना में कंकड़बाग, पोस्टल पार्क, योगीपुर, जक्कनपुर, महेंद्र नगर और राजेंद्र नगर पहले से डेंगू के हॉटस्पॉट रहे हैं। इन इलाकों के अलावा बोरिंग रोड, बुद्धा कॉलोनी, पाटलिपुत्र कॉलोनी, दीघा, रूपसपुर, अनीसाबाद, पटना सिटी और गुलजारबाग में भी मरीज मिलने की बात सामने आई है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन इलाकों में संक्रमण ज्यादा बताया जा रहा है, वहां लार्वीसाइडल के छिड़काव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अगर मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो संक्रमण का फैलाव और तेज हो सकता है।

आईजीआईएमएस के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. रोहित उपाध्याय के अनुसार डेंगू के चार प्रमुख सीरोटाइप माने जाते हैं—DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4। एक ही क्षेत्र में अलग-अलग सीरोटाइप का संक्रमण हो सकता है। डॉ. रोहित उपाध्याय के मुताबिक पहले डेंगू हो चुके व्यक्ति को यदि दूसरे सीरोटाइप से संक्रमण होता है तो गंभीर बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है।

आईजीआईएमएस के यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित उपाध्याय के अनुसार तेज बुखार को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। खासकर बुखार के साथ यदि मरीज में चेतावनी संकेत दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

पटना में डेंगू का आंकड़ा लगातार ऊपर जा रहा है और अब मौत की खबर ने खतरे को और गंभीर बना दिया है। हालांकि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक जांच का इंतजार है, लेकिन 170 से अधिक मामले और संक्रमण वाले इलाकों की बढ़ती संख्या साफ संकेत दे रही है कि मच्छरों के खिलाफ जंग को और धार देने की जरूरत है।बरसात के बाद जमा पानी, कमजोर सफाई व्यवस्था और मच्छरों के बढ़ते प्रजनन के बीच सितंबर-अक्टूबर का मौसम राजधानी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अब सवाल सिर्फ मरीजों की गिनती का नहीं, बल्कि डेंगू के डंक को रोकने के लिए जमीनी इंतजाम कितने पुख्ता हैं, इसका है।