Employment Fair Controversy:महिला अभ्यर्थी ने वायरल रिपोर्ट को बताया झूठा,वीडियो जारी कर दिया बयान
पटना के ज्ञान भवन में आयोजित रोजगार मेले में चयनित महिला अभ्यर्थी ने मीडिया रिपोर्टिंग पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति वीडियो बनाकर उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
बिहार सरकार के युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने एक दैनिक अख़बार के डिजिटल संस्करण में प्रकाशित खबर का कड़ा खंडन जारी किया है। विभाग ने "सम्राट ने जिसे जॉइनिंग लेटर दिया – उसे दिल्ली में कॉलगर्ल बनाया" शीर्षक वाली रिपोर्ट पर तुरंत संज्ञान लिया। प्राथमिक जांच के बाद अधिकारियों ने इस खबर को पूरी तरह तथ्यहीन, भ्रामक और वास्तविकता से परे करार दिया है।
अधिकारियों ने त्वरित पड़ताल कर अभ्यर्थी से किया संपर्क
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागीय अधिकारियों की एक टीम गठित की। जांच के दौरान टीम ने संबंधित महिला अभ्यर्थी से सीधा संपर्क स्थापित किया। इसके बाद अभ्यर्थी अपने पति के साथ अधिकारियों के समक्ष उपस्थित हुईं और पूरे मामले में अपना लिखित और वीडियो के जरिये बयान दर्ज कराया।
ज्ञान भवन रोजगार मेले से मिला था आईसीयू नर्स का पद
पीड़ित महिला अभ्यर्थी ने बताया कि उन्होंने पटना के ज्ञान भवन में आयोजित राज्य स्तरीय रोजगार मेले में अपना पंजीकरण कराया था। प्रक्रिया के दौरान नर्सिंग स्टाफ के रूप में उनकी योग्यता को देखते हुए संबंधित कंपनी द्वारा उन्हें आईसीयू नर्सिंग स्टाफ पद के लिए चुना गया और तुरंत नियुक्ति पत्र (Hiring Letter) सौंपा गया।
काम के घंटे और व्यवस्था को लेकर असहमति
कंपनी द्वारा दिए गए नियुक्ति पत्र के तहत जब वे कार्यस्थल पर पहुंचे, तो उन्हें 8 घंटे के बजाय 12 घंटे तक काम करने को कहा गया। मरीज की देखभाल (Caregiver) और रहने-खाने की व्यवस्था से संतुष्ट न होने के कारण दंपत्ति ने वहां से वापस आने का फैसला किया। महिला के पति भी उनके साथ गए थे और सुरक्षा व सहायता के लिए पास में ही ठहरे हुए थे।
पत्रकार पर बातों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप
वापस लौटने के बाद जब दंपत्ति अपनी समस्या को लेकर बात कर रहे थे, तभी एक महिला पत्रकार ने उनकी अनुमति के बिना पीछे से वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। अभ्यर्थी ने आरोप लगाया कि मरीज के परिजनों से होने वाली सामान्य 'वीडियो कॉलिंग' की बात को पत्रकार ने गलत संदर्भ में पेश किया और उनके शब्दों का दुरुपयोग कर खबर को बेहद शर्मनाक रूप दे दिया।
भ्रामक रिपोर्टिंग से सामाजिक छवि को नुकसान
दंपत्ति ने मीडिया संस्थान का बाकायदा नाम लेते हुए रिपोर्टिंग पर गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि खबर में दिखाए गए सभी दावे भ्रामक और असत्य हैं। इस सनसनीखेज और गलत रिपोर्टिंग के कारण उनके परिवार, परिजनों और समाज में उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंचा है तथा लगातार फोन आने से वे मानसिक तनाव झेल रहे हैं।
प्रशासनिक पहल और समस्या का समाधान
मामले के संज्ञान में आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर पहल की गई और अभ्यर्थियों की समस्या का पारदर्शी तरीके से समाधान किया गया। अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री और रोजगार विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मन में कोई शिकायत नहीं है, केवल मीडिया द्वारा फैलाई गई भ्रामक खबर से भ्रम और भ्रमित स्थिति उत्पन्न हुई थी।