Patna High Court: खनन नीलामी में लेटलतीफी पर हाईकोर्ट का शिकंजा, इतने करोड़ लौटाने का आदेश, नए टेंडर से पहले ये काम है जरुरी जरूरी

Patna High Court: बिहार में खनन पट्टों की नीलामी और उसके बाद की सरकारी प्रक्रिया में होने वाली देरी पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।...

Patna High Court:  बिहार में खनन पट्टों की नीलामी और उसके बाद की सरकारी प्रक्रिया में होने वाली देरी पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शेखपुरा के स्टोन ब्लॉक नंबर-27 से जुड़े मामले में जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्धता और सरकारी जवाबदेही को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने मेसर्स बालाजी एंटरप्राइज की ₹2.90 करोड़ की जब्त राशि वापस करने का आदेश दिया है। इस रकम पर जमा किए जाने की तारीख से भुगतान तक 12 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।

मामला वर्ष 2017 में शेखपुरा के स्टोन ब्लॉक नंबर-27 की हुई नीलामी से जुड़ा है। बालाजी एंटरप्राइज ने सबसे ऊंची बोली लगाई थी और 21 सितंबर 2017 को उसके पक्ष में लेटर ऑफ इंटेंट यानी LOI जारी किया गया। पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट यानी DSR और खनन क्षेत्र से जुड़े जियो-कोऑर्डिनेट्स को लेकर अड़चन सामने आई। कंपनी का कहना था कि जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होने से पर्यावरणीय स्वीकृति में देरी हुई।

बाद में जिला प्रशासन ने LOI रद्द कर ₹2.90 करोड़ की सुरक्षा राशि जब्त कर ली। इसके खिलाफ मामला अदालत पहुंचा। हाईकोर्ट ने देरी की पूरी कड़ी की पड़ताल करते हुए माना कि जिम्मेदारी केवल सफल बोलीदाता पर नहीं डाली जा सकती। अदालत ने यह भी पाया कि सरकारी स्तर पर जरूरी दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने में भी देरी हुई थी। साथ ही कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि बोलीदाता की ओर से भी पर्यावरणीय मंजूरी के लिए कदम उठाने में कुछ देरी हुई थी। यानी अदालत ने मामले में दोनों पक्षों के योगदान को ध्यान में रखा।

खंडपीठ ने जब्ती की कार्रवाई को निरस्त करते हुए ₹2.90 करोड़ वापस करने का निर्देश दिया। राशि पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि स्टोन ब्लॉक नंबर-27 के लिए नया टेंडर शुरू करने से पहले संबंधित रकम का भुगतान किया जाए। बालाजी एंटरप्राइज को नए टेंडर में भाग लेने से केवल उसके पिछले मामले के आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने भविष्य की खनन नीलामी प्रक्रिया के लिए कई अहम समय-सीमाएं तय की हैं। टेंडर नोटिस जारी करते समय जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करनी होगी और प्रत्येक खनन ब्लॉक के सटीक जियो-कोऑर्डिनेट्स उपलब्ध कराने होंगे। नीलामी के 15 दिनों के भीतर सफल बोलीदाता को लेटर ऑफ इंटेंट जारी करना होगा। इसके बाद सफल बोलीदाता को 15 दिनों के भीतर माइनिंग प्लान देना होगा और विभाग को अगले 15 दिनों में उस पर निर्णय लेना होगा।

माइनिंग प्लान की मंजूरी के बाद SEIAA में आवेदन के लिए भी सात दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है। अदालत ने साफ किया कि सरकारी विभागों की ओर से जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने में देरी होने पर उसकी जिम्मेदारी को भी रिकॉर्ड पर लिया जाएगा और परिस्थितियों के अनुसार सरकार पर आर्थिक दायित्व आ सकता है।

इस फैसले का असर केवल शेखपुरा के एक खनन ब्लॉक तक सीमित नहीं है। आदेश में तय की गई समयबद्ध प्रक्रिया से भविष्य की खनन नीलामी में DSR, जियो-कोऑर्डिनेट्स, LOI, माइनिंग प्लान और पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़े चरणों की जिम्मेदारी और समयसीमा अधिक स्पष्ट हो गई है। इससे नीलामी के बाद वर्षों तक फाइलों के अटकने जैसी स्थिति पर न्यायिक निगरानी का दायरा भी स्पष्ट होता है।