Patna High Court: 11 KM ब्रिटिशकालीन नहर पर कब्जे के मामले में पटना हाईकोर्ट सख्त, डीएम से मांगा हिसाब

Patna High Court: मोतीझील को बूढ़ी गंडक नदी के रामरेखा घाट-सिमरा से जोड़ने वाली ब्रिटिशकालीन नहर के दोनों किनारों पर हुए कथित अतिक्रमण के मामले में पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

Patna High Court: मोतिहारी शहर की मोतीझील को बूढ़ी गंडक नदी के रामरेखा घाट-सिमरा से जोड़ने वाली ब्रिटिशकालीन नहर के दोनों किनारों पर हुए कथित अतिक्रमण के मामले में पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी द्वारा 4 जून 2026 को जारी पत्र के संदर्भ में अब तक की गई कार्रवाई पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।इस मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह की खंडपीठ ने भारतीय न्यायप्रिय नागरिक परिषद की ओर से दायर जनहित याचिका पर की। मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने अदालत को बताया कि यह ब्रिटिशकालीन नहर मोतिहारी शहर की मोतीझील को बूढ़ी गंडक नदी स्थित रामरेखा घाट-सिमरा से जोड़ती है। इसकी लंबाई करीब 11 किलोमीटर है। अधिवक्ता के अनुसार, नहर के दोनों तरफ अतिक्रमण होने के कारण इसके अस्तित्व और उपयोगिता पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।

मोतीझील की ‘जीवनरेखा’ है नहर

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट के समक्ष नहर की उपयोगिता बताते हुए कहा कि मोतीझील को मोतिहारी शहर की जीवनरेखा माना जाता है। यह क्षेत्र की जल व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मोतीझील से शहर को पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ बाढ़ के दौरान यह नहर शहर की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाती है।उन्होंने अदालत को बताया कि 24 दिसंबर 2022 को कार्यपालक अभियंता, तिरहुत कैनाल डिवीजन, मोतिहारी ने पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर नहर की उपयोगिता की जानकारी दी थी। पत्र में नहर को बाढ़ के समय बेहद उपयोगी बताया गया था। साथ ही इसे मोतीझील के रिचार्ज के वैकल्पिक स्रोत के तौर पर भी महत्वपूर्ण बताया गया था।

कमेटी बनी, बैठकें हुईं, रिपोर्ट अब तक गायब

मामले में पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी ने नहर की स्थिति की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया था। कमेटी को जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मुद्दे पर कई बैठकें भी हो चुकी हैं, लेकिन अब तक विस्तृत रिपोर्ट सामने नहीं आई है। नहर पर कथित अतिक्रमण और कार्रवाई में देरी के कारण मोतिहारी शहर के लोगों को परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।अदालत ने अब जिलाधिकारी से 4 जून 2026 के पत्र के संदर्भ में हुई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा हलफनामे के माध्यम से पेश करने को कहा है। कोर्ट के इस निर्देश के बाद अब निगाहें अगली सुनवाई पर टिक गई हैं।

10 सितंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि प्रशासन ने नहर को अतिक्रमण से मुक्त कराने और उसकी पुरानी उपयोगिता बहाल करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं।

मामला सिर्फ एक ऐतिहासिक नहर के अस्तित्व का नहीं, बल्कि मोतिहारी की जल व्यवस्था, बाढ़ नियंत्रण और मोतीझील के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।