Patna High Court: पटना हाईकोर्ट में सरकारी दलील पर फूटा गुस्सा, इन तीन विभाग के सचिवों को किया तलब

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट में बिहार न्यायिक अकादमी से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान गुरुवार को अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया।...

हाईकोर्ट में सरकारी दलील पर फूटा गुस्सा- फोटो : social Media

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट में बिहार न्यायिक अकादमी से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान गुरुवार को अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया। एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सरकारी पक्ष की ओर से रिकॉर्ड में मौजूद नहीं दस्तावेज के आधार पर दी गई मौखिक दलील पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद राज्य के महाधिवक्ता एसडी संजय ने मामले से खुद को अलग कर लिया।

मामले में बरती जा रही कथित ढिलाई को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पथ निर्माण, वन तथा नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिवों को 11 सितंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। तीनों सचिवों को लंबित कार्यों की स्पष्ट और एकीकृत कार्ययोजना के साथ अदालत के समक्ष पेश होना होगा।

सुनवाई के दौरान एएजी-3 पीके वर्मा ने दावा किया कि महात्मा गांधी सेतु के नीचे के इलाके के विकास को लेकर पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया है। अदालत ने जब रिकॉर्ड की पड़ताल की तो ऐसा कोई हलफनामा या संबंधित दस्तावेज अभिलेख पर मौजूद नहीं मिला। इस पर पीठ ने साफ कहा कि रिकॉर्ड से बाहर की दलीलों के आधार पर न्यायिक कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

हाईकोर्ट ने 3 जून 2026 के अपने आदेश का भी हवाला दिया। उस आदेश में पथ निर्माण विभाग के अभियंता ने पुल के नीचे बाड़ लगाने और पौधारोपण का काम 30 जून तक पूरा करने का आश्वासन दिया था। अदालत ने कहा कि निर्धारित समय बीतने के बावजूद यह कार्य अब तक पूरा नहीं हुआ है।

बिहार न्यायिक अकादमी की ओर से अधिवक्ता पीयूष लाल ने अदालत को बताया कि दाखिल हलफनामे केवल उत्तरी सीमा दीवार तक सीमित हैं, जबकि पूर्वी हिस्से के विकास को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है। पीठ ने कहा कि मामला न्यायिक अकादमी की सुरक्षा, कामकाज और समुचित वातावरण से जुड़ा है, इसलिए इसे सामान्य विरोधी मुकदमे की तरह नहीं देखा जा सकता। अब 11 सितंबर को तीनों सचिवों की मौजूदगी में मामले की अगली सुनवाई होगी।