बेटे को जेल से छुड़ाने की याचिका पड़ी भारी, पटना हाईकोर्ट ने लगा दिया जुर्माना

हाईकोर्ट के समय की बर्बादी और मामलें की कार्यवाही को देखते हुए, कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर ₹5,000 का जुर्माना (लागत) भी बरकरार रखा है, जिसे दो सप्ताह के भीतर रजिस्ट्री में जमा करना होगा।

Patna High Court- फोटो : news4nation

Patna High Court : पटना हाईकोर्ट ने शशि भूषण प्रसाद सिंह द्वारा अपने बेटे दिव्या प्रकाश की रिहाई के लिए दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की पूरी जानकारी थी और उसे कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ है, तो गिरफ्तारी के समय लिखित आधार न देने जैसी तकनीकी या प्रक्रियात्मक कमियों से हिरासत अवैध नहीं हो जाती। इस मामलें की सुनवाई जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ ने की।


दिव्या प्रकाश को 5 जून, 2026 को खगड़िया सिविल कोर्ट परिसर के पास चित्रगुप्त नगर थाने के एक मामलें  के तहत गिरफ्तार किया गया था।याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि गिरफ्तारी के वक्त लिखित आधार न देना संविधान के अनुच्छेद 21 और 22(1) का उल्लंघन है।  


हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी को अपने ऊपर लगे आरोपों की पूरी जानकारी थी, क्योंकि उसने पहले ही अग्रिम जमानत याचिका दायर कर रखी थी।रिमांड के समय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आरोपी के अधिवक्ता ने कोर्ट में पेश होकर रिमांड का विरोध किया था, जिससे यह साबित होता है कि उसे बचाव का पूरा अवसर मिला।  


 सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए खंडपीठ ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि प्रक्रियात्मक चूक के कारण आरोपी को कोई वास्तविक पूर्वाग्रह या नुकसान हुआ है, तब तक ऐसी तकनीकी कमी को ठीक किया जा सकता है और इसके आधार पर हिरासत को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।  


हाईकोर्ट के समय की बर्बादी और मामलें की कार्यवाही को देखते हुए, कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर ₹5,000 का जुर्माना (लागत) भी बरकरार रखा है, जिसे दो सप्ताह के भीतर रजिस्ट्री में जमा करना होगा।