हाईकोर्ट सख्त: ट्रैफिक चालान के नाम पर विभाग की मनमानी नहीं चलेगी, सरकार बताए- कौन अधिकारी करेगा विवादों का निपटारा?

ट्रैफिक चालान के विवादों को लेकर पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि जब अन्य राज्यों में चालान का निपटारा लोक अदालत के जरिए हो सकता है, तो बिहार में ऐसा तंत्र क्यों नहीं है?

Patna - पटना हाईकोर्ट  ने राज्य में  ट्रैफिक चालान काटे जाने से सम्बन्धित विवादों को लोक अदालत में नहीं ले जाने के मामलें पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने रानी तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को अगली सुनवाई में  एक  अधिसूचना निकालने का निर्देश दिया है।

इस अधिसूचना में इन विवादों का कौन से अधिकारी निबटारा करेंगे।साथ ही अधिसूचना में ये बताया जायेगा किस न्यूनतम धनराशि तक के ट्रैफिक चालान काटे जाने से सबंधित विवादों का निबटारा किया जायेगा। इस मामलें की सुनवाई 28 अप्रैल,2026 को अगली सुनवाई की जाएगी।

कोर्ट ने कल की सुनवाई के दौरान ये जानना चाहा कि दूसरे राज्यों की तरह बिहार में चालान विवादों के निपटारे के लिए लोक अदालत का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार व बालसा से नोटिस जारी कर जवाब माँगा था ।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया कि  विभिन्न राज्यों में ट्रैफिक चालान काटे जाने से सम्बन्धित विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों द्वारा सुनवाई कर सेटलमेंट किया जाता है। कोर्ट ने इस पर  कहा कि विभिन्न राज्यों में  ट्रैफिक चालान सम्बन्धी विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों में सुनवाई व निपटारा किया जाता है।कोर्ट ने कहा कि उड़ीसा का भी उदाहरण देते हुए कहा कि वहां ट्रैफिक चालान सम्बन्धी विवादों को  लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों सुलझाया जाता है।

कोर्ट ने कहा कि सामान्य कोर्ट पर बोझ कम करने के लिए लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों का गठन किया गया है।कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे मामलों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों में  ले जाया  जाये और उनका वहां समाधान हो जाये,तय  सामान्य अदालतों पर बोझ भी कम होगा और समय भी बचेगा।

अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया कि चंडीगढ़ में लगातार दो सप्ताह लोक अदालत चला कर बड़ी संख्या में ट्रैफिक चालान से सम्बन्धित विवादों का समाधान किया गया।उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र,गुजरात,दिल्ली जैसे राज्यों में इस प्रकार के विवादों को लोक अदालतों के माध्यम से सुलझाया जाता है ।लेकिन बिहार में मनमानीविभागों  ढंग से चालान काटे जाते हैं। लेकिन इन विवादों के निपटारे के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है ।इससे लोगों को परिवहन विभाग के मनमानी का शिकार होना पड़ता है। 

उन्होंने कोर्ट को बताया कि  गुजरात,महाराष्ट्र व उड़ीसा जैसे राज्यों में विभाग की सक्रियता के कारण ऐसे मामलें लोक अदालतों में बड़ी तादाद में जाते है।इससे लोक अदालतों द्वारा ऐसे मामलों की संख्या बहुत दिखती है। 

अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कहा कि यदि बिहार में भी ट्रैफिक चालान काटे जाने से जुड़े विवादों को लोक अदालत व विशेष लोक अदालतों के माध्यम से सुलझाया जाये,तो राज्य के लोगों को काफी राहत मिलेगी।इस फोरम में जा कर वे जल्दी न्याय पा सकेंगे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अगर ट्रैफिक चालान लंबित होता है, तो उन्हें जबरदस्त्ती  ट्रैफिक चालान जमा करवाया जाता है।जबतक ट्रैफिक चालान जमा नहीं हो जाते,तब तक उन्हें प्रदूषण बोर्ड सर्टिफिकेट नहीं देता।ये मनमानी लगातार जारी है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 28 अप्रैल,2026 को होगी।कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख़ इसलिए निर्धारित की है,क्योंकि इस वर्ष मई के दूसरे सप्ताह में नौ तारीख को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होना है ।