पटना के कारगिल चौक पर हाई-वोल्टेज ड्रामा: नशे में धुत बड़े साहब के पुलिस स्टाफ की छात्रों से भिड़ंत, उठे सवाल

राजधानी पटना के कारगिल चौक पर बीते मंगलवार रात 'खाकी' और 'छात्रों' के बीच हिंसक झड़प हुई। आरोप है कि शराब के नशे में धुत एक बड़े पुलिस अधिकारी के स्टाफ ने छात्रों के साथ बदसलूकी की तो जमकर हंगामा हो गया ,नतीजतन स्थानीए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा

नशे में धुत बड़े साहब के पुलिस स्टाफ की छात्रों से भिड़ंत- फोटो : news 4 nation AI

राजधानी पटना का दिल, कारगिल चौक। रात को जहाँ सन्नाटा पसर जाना चाहिए था, वहाँ 'खाकी' के घमंड और नशे का एक ऐसा 'जहर' घुला कि पूरी तरह रणक्षेत्र बन गया। यह कोई मामूली हाथापाई नहीं थी, यह रसूख और कानून के सीधे टकराव का एक ज्वलंत उदाहरण था। एक बड़े पुलिस अधिकारी का स्टाफ मेंबर्स, अपनी वर्दी के गुरूर और शराब के सुरूर में डूबे, अपने दोस्तों के साथ निकले। उनके लड़खड़ाते कदम और मुहं से आती बदबू ही उनके इरादों का परिचय दे रही थी। बीते मंगलवार की रात कारगिल चौक पर  हुए हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जिसने पुलिस प्रशासन की साख पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

छात्रों का जमावड़ा और एक अदना सा विवाद

अमुमन, रात साढ़े आठ बजे के बाद कारगिल चौक पर आस पास के मोहल्लो समेत पटना यूनिवर्सिटी के छात्रों और हॉस्टल में रहने वाले युवाओं का जमावड़ा रहता है। वे यहाँ तफरी के दौरान सिगरेट का कश लेते हैं, चाय पीते हैं अपनी पढ़ाई-लिखाई और देश दुनिया  पर चर्चा करते हैं। यही वो जगह थी, जहाँ 'खाकी' का घमंड एक छोटी सी गुमटी पर सिगरेट जलाने को लेकर छात्रों से भिड़ गया। वर्दी का धौंस दिखाया गया, अपशब्दों का प्रयोग हुआ और देखते ही देखते मामला हाथापाई में बदल गया।

हाथापाई, हिंसा और 'शराबबंदी' का विरोधाभास

एक तरफ वर्दी का गुरूर, दूसरी तरफ नशे का सुरुर। यह सब एक ऐसे राज्य की राजधानी में हो रहा था, जहाँ 'पूर्ण शराबबंदी' का दावा किया जाता है। क्या यह शराबबंदी सिर्फ आम जनता के लिए है? क्या रसूखदारों के लिए कानून का कोई मतलब नहीं है? यह सवाल रात के उस पहर में  कारगिल चौक पर गूँजता रहा।

छात्रों का डट जाना और 'भाईचारे' का खेल

नशे में धुत स्टाफ ने न केवल छात्रों से बदसलूकी की, बल्कि अपने पद और 'बड़े साहब' के स्टाफ होने का धौंस जमाना शुरू कर दिया। वे छात्रों को चुप कराने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन छात्रों ने भी हार नहीं मानी। वे अपनी जगह पर डटे रहे और खाकी के अहंकार का मुकाबला किया। भीड़ जुटी, आक्रोश बढ़ा और स्थानीय पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। बताया जा रहा है कि ख़ाकी वाले तो स्थानिए थाने गए और 'भाईचारे' में छुट गए, पर उनके एक साथी को हिरासत में लेकर मेडिकल जांच के लिए भेजा गया। सूत्रों के अनुसार, पुष्टि होने पर वो प्रक्रिया के तहत फाइन देकर छूटा।

करतूत चर्चा का विषय

एक तरफ जहाँ डीजीपी विनय कुमार ने हाल ही में जिलों में नोडल प्रभारियों की नियुक्ति कर अनुशासन सख्त करने के निर्देश दिए हैं, वहीं राजधानी के दिल कहे जाने वाले कारगिल चौक पर पुलिस स्टाफ की यह करतूत चर्चा का विषय बनी हुई है। चर्चा है कि अनुशासनहीनता और शराबबंदी कानून के उल्लंघन के आरोप में संबंधित स्टाफ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।