पटना पुलिस की बर्बरता! गांजा पकड़ने के नाम पर युवक को उठाया जमकर पीटा, 20 हजार रुपये लेकर देर रात छोड़ा
पटना के पतुत पुलिस ओपी में दरोगा पर गंभीर आरोप। आरोप है कि गांजा बरामदगी के नाम पर एक दुकानदार को हिरासत में लेकर बेरहमी से पीटा गया और रिहा करने के बदले 20 हजार रुपये की अवैध वसूली की गई।डॉक्टरों ने भी फिजिकल असॉल्ट (पिटाई) की पुष्टि की है।
बिहार में प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) द्वारा कई थानों से अलग पुलिस आउटपोस्ट (ओपी) का निर्माण कराया गया था। हालांकि, इन्हीं ओपी से अब पुलिसिया रौब, अवैध वसूली और बर्बरता के गंभीर मामले सामने आने लगे हैं। ताजा मामला पालीगंज अनुमंडल के रानीतालाब थाना अंतर्गत पतुत पुलिस ओपी का है, जहां एक दारोगा और पुलिस बल पर एक दुकानदार को हिरासत में लेकर बेरहमी से पीटने तथा छोड़ने के एवज में 20 हजार रुपये की रिश्वत वसूलने का संगीन आरोप लगा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 21 सितंबर की शाम पतुत बाजार की है। आरोप है कि पतुत ओपी प्रभारी पुलिस टीम के साथ पहुंचे और स्थानीय दुकानदार उपेंद्र कुमार को कथित तौर पर सात पुड़िया गांजा के साथ रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस आरोपी युवक को गिरफ्तार कर ओपी ले आई। आरोप है कि ओपी परिसर में पुलिसकर्मियों ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के युवक की लाठियों से जमकर पिटाई कर दी, जिससे वह बुरी तरह चोटिल और घायल हो गया।
पिटाई से बुरी तरह जख्मी युवक को रिहा करने के बदले पुलिस द्वारा 20 हजार रुपये की मांग की गई। पीड़ित उपेंद्र कुमार ने इस बात की सूचना तुरंत अपने परिजनों को दी। परिजनों ने देर रात करीब 10 बजे पैसे का इंतजाम किया और ओपी पहुंचकर दिलीप सिंह नामक व्यक्ति के माध्यम से पुलिस को रकम सौंपी। पैसे वसूलने के बाद पुलिस ने पीड़ित से एक सादे कागज पर 'अपने परिवार के साथ सुरक्षित घर जा रहा हूँ' लिखवा कर देर रात उसे छोड़ दिया, जबकि जब्त गांजा अपने पास ही रख लिया।
हिरासत से छूटने के बाद पीड़ित ने बिहटा-विक्रम के सरकारी अस्पताल में अपना इलाज कराया, जहां डॉक्टरों ने शारीरिक हमले (फिजिकल असॉल्ट) और गंभीर अंदरूनी चोटों की पुष्टि की है। पीड़ित ने खुद वीडियों जारी कर न केवल पूरी घटना के बाबत जानकारी साझा कि बल्कि उपेंद्र का साफ कहना है कि गांजा बरामदगी के नाम पर उसे फर्जी तरीके से उठाया गया, बेरहमी से पीटा गया और पैसे ऐंठने के बाद साक्ष्य के तौर पर गांजे को भी जब्त सूची में दर्ज करने के बजाय खुद दबा लिया गया। इस घटना से स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पटना से ऋषिकेश की रिपोर्ट