Patna Traffic Diversion: पटना के 46 साल पुराने राजेंद्रनगर आरओबी की बढ़ेगी उम्र, 25 साल तक भारी ट्रैफिक का दबाव झेलने की तैयारी, चारपहिया वाहनों पर इस दिन से रोक

Patna Traffic Diversion:राजधानी पटना की यातायात व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले राजेंद्रनगर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) को अब नए सिरे से मजबूत किया जा रहा है।...

चारपहिया वाहनों पर रोक- फोटो : social Media

Patna Traffic Diversion:राजधानी पटना की यातायात व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले राजेंद्रनगर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) को अब नए सिरे से मजबूत किया जा रहा है। करीब 46 साल पुराने इस पुल की उम्र बढ़ाने और अगले 25 वर्षों तक भारी ट्रैफिक का दबाव झेलने लायक बनाने के लिए मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण का काम शुरू कर दिया गया है। पथ निर्माण विभाग की ओर से पुल के पिलरों को अतिरिक्त मजबूती देने के लिए विशेष तकनीकी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस काम के चलते 5 नवंबर तक पुल पर चारपहिया और भारी वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

46 साल पुराने पुल को मिलेगी नई मजबूती

राजेंद्रनगर आरओबी का निर्माण 1980 के आसपास पूरा हुआ था, जबकि इसकी डिजाइनिंग 1975 में की गई थी। उस दौर में पटना की बढ़ती आबादी और उत्तर-दक्षिण हिस्सों के बीच बेहतर संपर्क की जरूरत को ध्यान में रखकर इसका निर्माण कराया गया था। पुल की सबसे बड़ी खासियत इसकी पर्याप्त चौड़ाई रही है। यही वजह है कि वर्षों तक भारी यातायात के बावजूद इस पर अपेक्षाकृत सुगम आवागमन बना रहा।

हालांकि, समय के साथ वाहनों की संख्या और भार में काफी इजाफा हुआ है। ऐसे में पुल के पिलरों की मजबूती बढ़ाना जरूरी हो गया था। नूतन राजधानी पथ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अभिषेक कुमार के मुताबिक, भारी ट्रैफिक के लगातार दबाव को देखते हुए पिलरों की स्ट्रेंथ बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इसके लिए पिलरों की पाइलिंग की मोटाई बढ़ाई जा रही है। आधुनिक रेट्रोफिटिंग तकनीक के जरिए पुल के बुनियादी ढांचे को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की कोशिश हो रही है।

राजेंद्रनगर आरओबी ने बदली थी पटना की कनेक्टिविटी

राजेंद्रनगर ओवरब्रिज का इतिहास पटना के शहरी विकास से जुड़ा हुआ है। 1980 के दशक से पहले उत्तर और दक्षिण पटना के बीच आवागमन के लिए लोगों को कोलकाता-पटना-मुगलसराय रेल लाइन की रेलवे गुमटियों पर निर्भर रहना पड़ता था। ट्रेन गुजरने के दौरान गुमटियां बंद होने से सड़कों पर लंबा जाम लग जाता था। लोगों को कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता था।

इस समस्या से निजात दिलाने के लिए चिरैयाटांड़, राजेंद्रनगर और चितकोहरा में रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए। बाद में भिखारी ठाकुर आरओबी भी इस व्यवस्था का हिस्सा बना। इन पुलों ने कंकड़बाग, करबिगहिया, मीठापुर और अनीसाबाद जैसे इलाकों को गांधी मैदान तथा सचिवालय क्षेत्र से बेहतर तरीके से जोड़ दिया।चिरैयाटांड़ आरओबी का पुनर्निर्माण हो चुका है, जबकि चितकोहरा आरओबी की छत की हाल में मरम्मत की गई है। अब राजेंद्रनगर आरओबी को भी आधुनिक तकनीक से नया जीवन देने की तैयारी है।

5 नवंबर तक बदला रहेगा यातायात का रास्ता

मरम्मत कार्य के कारण प्रशासन ने वाहनों के परिचालन को लेकर विशेष ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। इन वाहनों पर प्रतिबंध रहेगा- कार और जीप,-बस और ट्रक, सभी भारी व्यावसायिक वाहन  पर प्रतिबंध रहेगा तो बाइक और स्कूटर, साइकिल और रिक्शा, ई-रिक्शा और ऑटो को  छूट मिलेगी

वैकल्पिक रास्ते: कंकड़बाग, पुराना बाइपास और गुलजारबाग की ओर आने-जाने वाले चारपहिया वाहन चालक आरएन सिंह मोड़ अथवा बहादुरपुर वाले मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं।

वाहन चालकों को होगी असुविधा, लेकिन भविष्य में मिलेगी राहत

राजेंद्रनगर आरओबी पर प्रतिबंध के कारण अगले कुछ दिनों तक आसपास के इलाकों में यातायात का दबाव बढ़ सकता है। खासकर कंकड़बाग, राजेंद्रनगर और पुराने बाइपास की ओर आने-जाने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलना होगा।हालांकि, इस मरम्मत का उद्देश्य केवल मौजूदा क्षति को ठीक करना नहीं, बल्कि पुल को आने वाले वर्षों की यातायात जरूरतों के अनुरूप मजबूत बनाना है। करीब साढ़े चार दशक से पटना की लाइफलाइन बने इस ओवरब्रिज को अगले 25 वर्षों तक सुरक्षित रखने की यह कवायद शहर के आधारभूत ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।