हाई-वोल्टेज ड्रामा और फिर शादी: पटना महिला आयोग दफ्तर की कहानी
राजधानी पटना के महिला आयोग दफ्तर में भारी ड्रामे के बाद एक प्रेमी जोड़े ने शादी कर ली। परिजनों के विरोध के कारण स्थिति इतनी बिगड़ गई कि डायल 112 की टीम बुलानी पड़ी। भारी हंगामे के बिच प्रेमी ने प्रेमिका के मांग में भरा सिंदूर
बिहार की राजधानी पटना स्थित राज्य महिला आयोग के दफ्तर में उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब एक प्रेमी जोड़े ने आयोग के अधिकारियों के सामने विवाह करने का निर्णय लिया। परिजनों के कड़े विरोध के चलते कार्यालय परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया और स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सुरक्षा के लिए 'डायल 112' की पुलिस टीम को बुलाना पड़ा। लगभग दो घंटे तक चली खींचतान और बहसबाजी के बाद अंततः लड़के ने आयोग के सदस्यों की मौजूदगी में लड़की की मांग भरी और उसे अपनी पत्नी स्वीकार किया।
किराएदार से प्यार और परिजनों का कड़ा विरोध
इस प्रेम कहानी की शुरुआत एक मकान मालिक और किराएदार के रिश्ते से हुई थी। मिली जानकारी के अनुसार, युवक उस लड़की के घर में किराएदार के तौर पर रहता था, जहाँ दोनों के बीच प्रेम संबंध विकसित हो गए। जब उन्होंने साथ रहने का फैसला किया, तो उनके परिवार इस रिश्ते के खिलाफ खड़े हो गए। मामला जब महिला आयोग तक पहुँचा, तो वहाँ भी परिजनों ने जमकर हंगामा किया और जोड़े को अलग करने की कोशिश की, जिसके कारण आयोग परिसर में घंटों अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
पुलिस की मौजूदगी में संपन्न हुई मांग भराई की रस्म
हंगामे को बढ़ता देख आयोग के कार्यालय में तैनात कर्मियों ने स्थानीय पुलिस को सूचित किया। पुलिस के हस्तक्षेप और आयोग के सदस्यों द्वारा समझाए जाने के बाद स्थिति कुछ हद तक शांत हुई। चूंकि दोनों बालिग थे और एक-दूसरे के साथ रहने पर अड़े थे, इसलिए आयोग की निगरानी में ही शादी की प्रक्रिया पूरी की गई। युवक ने सबके सामने सिंदूर से लड़की की मांग भरी, जिसके बाद दोनों ने आधिकारिक तौर पर एक-दूसरे को जीवनसाथी मान लिया।
आयोग की निगरानी में अब नवविवाहित जोड़े की सुरक्षा
शादी संपन्न होने के बाद भी दोनों पक्षों के बीच तनाव बरकरार है, जिसे देखते हुए महिला आयोग ने मामले को अपनी प्राथमिकता में रखा है। आयोग अब इस नवविवाहित जोड़े की सुरक्षा की सीधी निगरानी कर रहा है ताकि घर लौटने पर उन्हें किसी प्रकार के शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न का सामना न करना पड़े। अधिकारियों का कहना है कि बालिग होने के नाते उन्हें अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक अधिकार है और इसकी रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।