NEET 2026 : पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नीट यूजी 2026 में स्वतंत्रता सेनानी के आश्रितों को 2% आरक्षण देने की मांग वाली याचिका किया खारिज

NEET 2026 : पटना हाईकोर्ट ने नीट यूजी 2026 की काउंसलिंग में स्वतंत्रता सेनानी के आश्रितों को 2 प्रतिशत क्षैतिज (हॉरिजॉन्टल) आरक्षण देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।

याचिका ख़ारिज - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने नीट यूजी 2026 के काउंसलिंग में स्वतंत्रता सेनानी के आश्रितों को 2 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की मांग वाली याचिका को रद्द कर दिया। जस्टिस हरीश कुमार की एकल पीठ ने श्रुति सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्णय दिया। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार सरकार ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए स्वतंत्रता सेनानी के परिजनों को आरक्षण देने का कोई नीतिगत फैसला नहीं लिया है। ऐसे में कोर्ट आवेदिका के पक्ष में कोई सकारात्मक आदेश नहीं दे सकता।

वहीं कोर्ट को बताया गया कि आवेदिका नीट यूजी 2026 में 720 में से 439 अंक हासिल की है। उसे ऑल इंडिया रैंक 1,88,791 और कैटेगरी रैंक 22,781 मिला हैं। कोर्ट को बताया गया कि आवेदिका दिवंगत शशि भूषण प्रसाद ठाकुर उर्फ राम हिलीश ठाकुर की नातिन है। केंद्र सरकार ने उन्हें  स्वतंत्रता सेनानी स्वतंत्रता सेनानी घोषित कर पेंशन दे रही थी।

बिहार सरकार के गजट में 3 सितंबर, 2015 को प्रकाशित अधिसूचना में केंद्र सरकार से पेंशन प्राप्त स्वतंत्रता सेनानियों के पोते-पोतियों और आश्रितों को 2 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का फैसला लिया गया था। यह नीति बाद के विभागीय निर्देशों से लागू भी की गई। एमबीबीएस काउंसलिंग में यह लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया। वहीं बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा कि 2015 की अधिसूचना राज्य सरकार की नौकरियों में नियुक्ति के लिए है,न की शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए। 

2003 की अधिसूचना में भी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए स्वतंत्रता सेनानी के आश्रितों को 2 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान नहीं था। कोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत तथ्यों को सुनने के बाद कहा कि 2015 की अधिसूचना नियुक्ति और चयन से सम्बंधित है,शिक्षण संस्थानों में दाखिले से नहीं। कोर्ट ने कहा कि  कुछ अन्य शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में यह लाभ दिया गया है, लेकिन मेडिकल पाठ्यक्रम के लिए ऐसा कोई फैसला नहीं किया गया। कोर्ट ने याचिका को रद्द कर दिया।