पटना के एलएनजेपी अस्पताल में प्रमोशन और पोस्टिंग पर उठे सवाल: सीनियर डॉक्टर दरकिनार, जूनियर संभाल रहे कमान
Bihar News : बिहार स्वास्थ्य सेवा में इन दिनो प्रमोशन और पोस्टिंग की प्रक्रिया गंभीर सवालों के घेरे में है। पटना के एलएनजेपी अस्पताल से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जहां वरिष्ठ डॉक्टरों की अनदेखी करते हुए उनसे जुनियर डॉक्टरों को पदोन्नति दी गई है..
Patna : बिहार सरकार के अधीन संचालित लोकनायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) अस्पताल, राजवंशीनगर, पटना में नए वर्ष की शुरुआत से ही प्रोन्नति (प्रमोशन) और पोस्टिंग को लेकर एक अजीबोगरीब प्रशासनिक स्थिति उत्पन्न हो गई है। वर्षों की लंबी सेवा और अटूट अनुभव के बावजूद कई वरिष्ठ चिकित्सक आज भी अपने मूल पदों पर कार्य करने को मजबूर हैं, जबकि उनसे काफी जूनियर चिकित्सकों को निदेशक एवं उप-निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। बिहार स्वास्थ्य सेवा में इन दिनों चल रही यह प्रक्रिया न केवल विभागीय अनुशासन पर सवालिया निशान खड़ा कर रही है, बल्कि अनुभवी डॉक्टरों के मनोबल को भी गहरा आघात पहुंचा रही है।
1990 बैच के डॉक्टर्स कतार में, 2020 बैच के जूनियर को मिला उच्चतर प्रभार
विभागीय विसंगति का आलम यह है कि स्वास्थ्य सेवा के 1990 बैच के कई वरिष्ठ चिकित्सक आज भी पदोन्नति की आस में प्रतीक्षा कर रहे हैं। दूसरी ओर, महज 2020 बैच के जूनियर चिकित्सक डॉ. शक्ति किशोर को उच्चतर प्रभार के तहत सीधे उप-निदेशक के महत्वपूर्ण पद पर प्रमोट कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के इतिहास में संभवतः यह पहला अवसर है जब अनुभव और वरिष्ठता को पूरी तरह दरकिनार कर जूनियर अधिकारियों को प्राथमिकता दी गई है। सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि विभागीय वरीयता सूची 2025 स्वयं इन वरिष्ठ अधिकारियों के पक्ष में है, इसके बावजूद उनकी पदोन्नति की फाइलें लालफीताशाही की भेंट चढ़ी हुई हैं।
निदेशक डॉ. राकेश चौधरी संभाल रहे दो पूर्णकालिक पद, एनएमसी नियमों का उल्लंघन
वर्तमान में एलएनजेपी अस्पताल, राजवंशीनगर के निदेशक डॉ. राकेश चौधरी हैं, जिन्होंने जनवरी 2026 में इस पद का प्रभार ग्रहण किया था। वह इस बड़े अस्पताल के निदेशक होने के साथ-साथ पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (HOD) के पद पर भी कार्यरत हैं। नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) के “Medical Institutions Qualification of Faculty Regulations, 2025” के अनुसार कोई भी फैकल्टी सदस्य दो अलग-अलग संस्थानों में एक साथ पूर्णकालिक पद पर कार्य नहीं कर सकता। इसके बावजूद एक साथ दो-दो महत्वपूर्ण पूर्णकालिक पदों की जिम्मेदारी संभालने की इस व्यवस्था ने प्रशासनिक और कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं।
साढ़े चार महीने में निदेशक ने न देखी ओपीडी और न की कोई सर्जरी
दो अलग-अलग बड़े संस्थानों में पूर्णकालिक जिम्मेदारी होने का सीधा असर अब अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों के हितों पर पड़ता दिख रहा है। निदेशक पद का कार्यभार ग्रहण करने के लगभग साढ़े चार महीने बीत जाने के बाद भी डॉ. राकेश चौधरी ने एलएनजेपी अस्पताल में न तो किसी मरीज को ओपीडी में देखा है और न ही कोई शल्यक्रिया (सर्जरी) संपन्न की है। अस्पताल में कई योग्य, विशेषज्ञ और वरिष्ठ चिकित्सकों की उपलब्धता के बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें इन शीर्ष पदों पर प्रोन्नति न देकर इस तरह की दोहरी व्यवस्था को जारी रखना विभागीय उदासीनता को साफ तौर पर उजागर करता है।
सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार से न्याय की उम्मीद
इस घोर उपेक्षा और विसंगति से आहत होकर वरिष्ठ अधिकारियों ने पूर्व विभागीय सचिव लोकेश कुमार सिंह के समक्ष उपस्थित होकर अपनी पीड़ा भी व्यक्त की थी, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार के दौरान यह मामला लंबे समय तक अधर में लटका रहा। अब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार से इन प्रताड़ित और अनुभवी चिकित्सकों की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं। डॉक्टरों को पूरा भरोसा है कि सूबे के कर्मठ एवं न्यायप्रिय मुख्यमंत्री इस गंभीर प्रशासनिक विसंगति का संज्ञान लेंगे और व्यवस्था में पारदर्शिता व संतुलन स्थापित करते हुए वरिष्ठ चिकित्सकों को उनका उचित अधिकार दिलाएंगे।