Bihar Politics: राबड़ी देवी का नया बगला 39 हार्डिंग रोड, BJP, कांग्रेस और RJD तीनों दल के बड़े नेता हुए राजनीतिक संकट के शिकार, पढ़िए सत्ता के ज़ाविये से उपजी सियासी दास्तान
अक्सर इमारतें केवल ईंट-पत्थर नहीं होतीं—वे प्रतीक बन जाती हैं, मिथक बन जाती हैं. और 39 हार्डिंग रोड अब एक ऐसा ही प्रतीक है—जिसके दरवाज़े पर सत्ता का साया पड़ते ही किस्मत की करवट बदल जाती है।
Bihar Politics:पटना की राजनीतिक फिज़ाओं में इन दिनों एक पता 39 हार्डिंग रोड, ऐसा गूंज रहा है, मानो यह महज़ एक मकान नहीं बल्कि बिहार की सत्ता-व्यवस्था का कोई अशुभ नक्षत्र हो. पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को यह आवास आवंटित होते ही सूबे की सियासत में नये किस्से, नयी अफ़वाहें और नये राजनीतिक चर्चा जन्म लेने लगे हैं. कहा जा रहा है कि यह घर ऐसा “मनहूस मकान” है, जहाँ ठहरने वाले नेता या तो सत्ता के गलियारों से ओझल हो जाते हैं या फिर उनकी सियासी चमक जल्दी ही ठंडी पड़ जाती है. यह दास्तान यूँ ही नहीं बनी; इसकी तह में गहरे उतरें तो बीजेपी, आरजेडी और कांग्रेस—तीनों दलों के नेताओं की तक़दीरें इस पते से जुड़कर अजीब मोड़ लेती दिखाई देती हैं।
इस पते पर आरजेडी के भूपेंद्र प्रसाद वर्मा और शमीम अहमद रह चुके हैं, जो कभी सत्ता की चमक के केंद्र थे, पर आगे चलकर उनकी राजनीतिक उपस्थिति फीकी पड़ गई. इसी कड़ी में बीजेपी के चंद्र मोहन राय, विनोद नारायण झा और रामसूरत राय का नाम भी आता है. उम्मीदों से लबरेज़ इन नेताओं का राजनीतिक रुतबा इस आवास से जाने के बाद जैसे धुंध में गुम होता चला गया. हद तो यह कि रामसूरत राय को तो हालिया विधानसभा चुनाव में टिकट तक नसीब नहीं हुआ. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री रहे मदन मोहन झा भी इस सूची में शामिल हैं; इस आवास में प्रवेश के कुछ ही समय बाद महागठबंधन की सरकार गिर गई और उनका मंत्री पद हो या प्रदेश अध्यक्ष का ओहदा—दोनों हाथ से फिसल गए।
सियासी हाशिए पर जाने का यह सिलसिला महज़ इत्तिफ़ाक नहीं माना जा रहा। कहा यह तक जा रहा है कि इस घर में कदम रखते ही मानो राजनीतिक किस्मत पर कोई अदृश्य साया पड़ जाता है—धीरे-धीरे नेता सत्ता के स्क्रीन से नेपथ्य में चले जाते हैं. कभी प्रदेश की राजनीति में धाक जमाने वाले चंद्र मोहन राय आज अपने ही दल की चर्चाओं में शायद ही शुमार होते हों—यह बात इस ‘अनलकी’ आवास की कहानी को और रहस्यमयी बना देती है।
हालाँकि सुविधाओं के लिहाज़ से यह आवास कमाल का है दो मंज़िलों में फैला, छः बड़े कमरे, विशाल कारपेट एरिया और भरापूरा बगीचा. राबड़ी देवी के मौजूदा 10 सर्कुलर रोड आवास से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मकान किसी पूर्व मंत्री या मुख्यमंत्री के लिए किसी भी तरह कमतर नहीं. मगर अक्सर इमारतें केवल ईंट-पत्थर नहीं होतीं—वे प्रतीक बन जाती हैं, मिथक बन जाती हैं. और 39 हार्डिंग रोड अब एक ऐसा ही प्रतीक है—जिसके दरवाज़े पर सत्ता का साया पड़ते ही किस्मत की करवट बदल जाती है।
राबड़ी देवी को यह आवास मिलना ही बिहार की सियासत में नए समीकरणों, नई चर्चाओं और पुराने डरावने ‘रिकॉर्ड’ की याद ताज़ा कर रहा है. अब नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह आवास अपनी ‘अनलकी’ पहचान को दोहराएगा या राबड़ी देवी के ज़रिये राजनीति इसे एक नया अंजाम देगी।