Railway Tender Scam: लालू परिवार को अभी नहीं मिली राहत, आरोप तय करने पर फैसला फिर टला, अब 16 जुलाई को होगी सुनवाई

Railway Tender Scam: बहुचर्चित रेलवे टेंडर घोटाला और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दलप्रमुख लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों को लेकर दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में चल रही सुनवाई एक बार फिर टल गई

लालू परिवार को अभी नहीं मिली राहत- फोटो : social Media

Railway Tender Scam: बहुचर्चित रेलवे टेंडर घोटाला और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दलप्रमुख लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों को लेकर दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में चल रही सुनवाई एक बार फिर टल गई है। अदालत ने आरोप तय करने के मुद्दे पर अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रखते हुए अब 16 जुलाई को आदेश सुनाने की तारीख निर्धारित की है।

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले में फैसला सुनाने को लेकर नई तारीख तय की है। इससे पहले भी अदालत 6 मई और 22 मई को अपना आदेश टाल चुकी थी। उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने 13 फरवरी को ही इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, लेकिन अब तक अंतिम आदेश नहीं सुनाया गया है।यह मामला उस कथित अनियमितता से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने रेलवे के रांची और पुरी स्थित दो होटलों के संचालन एवं रखरखाव के लिए टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन होटलों का आवंटन कथित तौर पर कोचर बंधुओं की कंपनी सुजाता होटल को दिया गया था और इसके बदले लाभ पहुंचाने की साजिश रची गई।

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। 17 सितंबर 2018 को अदालत ने ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लिया था, जिसमें लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत 16 लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है।

बता दें कि  28 जनवरी 2019 को अदालत ने ईडी के मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को नियमित जमानत प्रदान की थी। वहीं 19 जनवरी 2019 को सीबीआई के मामले में भी लालू यादव को नियमित जमानत मिल चुकी थी। इसके बाद 13 अक्टूबर 2025 को अदालत ने सीबीआई से जुड़े मामले में लालू परिवार समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। अब सभी की निगाहें 16 जुलाई पर टिकी हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाएंगे या नहीं। इस बहुचर्चित मामले का राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर व्यापक असर माना जा रहा है।