घूसखोरी मामले में तत्कालीन बख्तियारपुर प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक राम कुमार सिंह दोषी करार, विशेष निगरानी न्यायालय ने सुनाई चार साल की सजा
भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे मुहिम में निगरानी को बड़ी सफलता हाथ लगी है। विशेष निगरानी न्यायालय ने घूसखोरी से जुड़े मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन बख्तियारपुर प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक राम कुमार सिंह दोषी करार देते हुए सख्त सजा सुनाई
Patna : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को एक और बड़ी सफलता मिली है। पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय ने भ्रष्टाचार से जुड़े एक पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए तत्कालीन प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक राम कुमार सिंह को दोषी करार दिया है और उन्हें सजा सुनाई है। यह पूरा मामला पटना जिले के बख्तियारपुर प्रखंड से जुड़ा हुआ है।
आठ हजार रुपये रिश्वत लेते 11 अप्रैल 2014 को हुए थे गिरफ्तार
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला बख्तियारपुर प्रखंड का है, जहां आरोपी राम कुमार सिंह पर दूसरी किस्त की सरकारी राशि जारी करने के एवज में परिवादी से आठ हजार रुपये की अवैध रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप था। इस शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए निगरानी विभाग की टीम ने 11 अप्रैल 2014 को आरोपी को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
अनुसंधानकर्ता की प्रभावी जांच और अभियोजन की मजबूत पैरवी
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गहन जांच तत्कालीन अनुसंधानकर्ता नरेश शर्मा द्वारा पूरी की गई थी। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से बेहद प्रभावी पैरवी की गई, जिसके परिणामस्वरूप साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दोषी ठहराया।
अलग-अलग धाराओं के तहत सुनाई गई सजा और जुर्माना
अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दोषी को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और चार हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा, धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास और चार हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया है। अदालत के निर्देशानुसार, ये दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
वर्ष 2026 में अब तक 23 मामलों में हो चुकी है दोषसिद्धि
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत वर्ष 2026 में अब तक कुल 23 मामलों में न्यायालयों द्वारा भ्रष्ट लोक सेवकों को दोषी ठहराया जा चुका है। ब्यूरो की इस प्रकार की सख्त कार्रवाइयों से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
अनिल की रिपोर्ट