Bihar Politics: इस्तीफा नामंजूर,रो पड़े शिवचंद्र राम, लेकिन राजद ने नहीं छोड़ा साथ! सियासी गलियारों में तेज हुई चर्चाएं
Bihar Politics: एमएलसी चुनाव में टिकट नहीं मिलने से आहत शिवचंद्र राम ने अपने दर्द को सार्वजनिक किया और पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी थी। हालांकि अब राजद नेतृत्व ने बड़ा फैसला लेते हुए उनके इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया है।...
Bihar Politics:बिहार की सियासत में सोमवार को उस वक्त भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा जब राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम मीडिया के सामने अपनी पीड़ा बयां करते हुए फूट-फूटकर रो पड़े। एमएलसी चुनाव में टिकट नहीं मिलने से आहत शिवचंद्र राम ने अपने दर्द को सार्वजनिक किया और पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी थी। हालांकि अब राजद नेतृत्व ने बड़ा फैसला लेते हुए उनके इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया है।
एमएलसी चुनाव को लेकर पार्टी के अंदर चल रही सियासी हलचल के बीच शिवचंद्र राम की नाराजगी खुलकर सामने आई थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा था कि वह वर्ष 1990 से राजद के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं और पार्टी के हर फैसले का सम्मान करते हुए नेतृत्व के निर्देशों का पालन किया है। उन्होंने लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि उन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से पार्टी की सेवा की, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने उन्हें अंदर तक आहत कर दिया है।
अपनी बात रखते-रखते शिवचंद्र राम भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा, “ऐसी जिंदगी भगवान करे कभी किसी को न दे...”। यह कहते हुए वह खुद को संभाल नहीं सके और प्रेस वार्ता में मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
दरअसल, बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए राजद की ओर से सुनील सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। टिकट की दौड़ में शिवचंद्र राम का नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल था, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम नहीं आने से वह बेहद निराश हो गए थे। इसके बाद उनके इस्तीफे की खबर ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया था।
हालांकि पार्टी नेतृत्व ने स्थिति को संभालते हुए उनके इस्तीफे को नामंजूर कर दिया है। राजद के इस कदम को संगठन में एकजुटता बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व शिवचंद्र राम की नाराजगी दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है। इतना तय है कि राजद ने अपने पुराने और अनुभवी नेता को खोने का जोखिम नहीं उठाया है, लेकिन टिकट को लेकर उठी यह टीस बिहार की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रह सकती है।