Bihar RCD News:पथ निर्माण मंत्री का बड़ा फैसला,लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों को डिबार करने का दिया निर्देश
बिहार के पथ निर्माण मंत्री ई० शैलेन्द्र ने अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज जिलों की सड़क योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने काम में देरी करने वाले संवेदकों को डिबार करने और टेंडर से पहले भूमि अधिग्रहण व फॉरेस्ट क्लीयरेंस पूरा करने का सख्त निर्देश द
पटना में पथ निर्माण मंत्री ई० शैलेन्द्र ने अपने कार्यालय कक्ष में विभागीय वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में विशेष रूप से सीमांचल के चार प्रमुख जिलों- अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज में चल रही सड़क व पुल निर्माण से जुड़ी विभागीय योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान माननीय मंत्री को इन सभी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की वर्तमान प्रगति और जमीनी स्थिति से अवगत कराया गया।
लेट-लतीफी पर कड़ा रुख: लापरवाही बरतने वाले संवेदक होंगे डिबार
बैठक में मंत्री ने विलंब से चल रही योजनाओं को लेकर सख्त नाराजगी जाहिर की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आदेश दिया कि तय समय सीमा में काम पूरा न करने वाले ठेकेदारों (संवेदकों) को तुरंत नोटिस जारी किया जाए। मंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि जो संवेदक समय पर काम पूरा नहीं करेंगे, उन्हें डिबार (ब्लैकलिस्ट) करने की कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही उन्होंने जिम्मेदार विभागीय इंजीनियरों को भी पूरी गंभीरता दिखाते हुए हर हाल में गुणवत्तापूर्ण तरीके से समय पर काम पूरा कराने का निर्देश दिया।
टेंडर से पहले प्री-कन्स्ट्रक्शन कार्य पूरा करने का सख्त निर्देश
योजनाओं में होने वाली देरी को रोकने के लिए ई० शैलेन्द्र ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना का टेंडर (निविदा) निकालने से पहले सभी प्री-कन्स्ट्रक्शन गतिविधियां जैसे—भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition), फॉरेस्ट क्लीयरेंस, यूटिलिटी शिफ्टिंग और पर्यावरण क्लीयरेंस से जुड़े कामों को अनिवार्य रूप से पूरा कर लिया जाए। ऐसा करने से परियोजनाओं को बीच में रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे सरकार के समय और राजस्व दोनों की भारी बचत होगी।
अंतर्विभागीय बाधाओं को दूर करने के लिए सीएम और मंत्रियों को पत्र
अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण कार्य विभाग या जल संसाधन विभाग से समय पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) न मिलने या सड़कों का ट्रांसफर न होने से योजनाएं लटक जाती हैं। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए मंत्री ई० शैलेन्द्र ने ग्रामीण कार्य विभाग और जल संसाधन विभाग के मंत्रियों को अपने स्तर से अनुरोध पत्र भेजने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्होंने राज्य के माननीय मुख्यमंत्री को भी इस वस्तुस्थिति से अवगत कराने के लिए एक आधिकारिक पत्र भेजने का आदेश विभागीय अधिकारियों को दिया।
रिपोर्ट - नरोत्तम कुमार