सहरसा सदर अस्पताल कांड : हटाए गए उपाधीक्षक और प्रबंधक पर FIR व बर्खास्तगी की मांग, स्वास्थ्य मंत्री को आवेदन

सहरसा सदर अस्पताल कांड मामले के आरोपी प्रभारी उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधक को पद हटाने के बाद भी मामला थमता नजर नही आ रहा। बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने स्वास्थ्य मंत्री से अब दोनो के खिलाफ जांच और एफआईआर करने की मांग कर दी है.....

उपाधीक्षक और प्रबंधक पर FIR व बर्खास्तगी की मांग- फोटो : नरोत्तम कुमार

Patna : सहरसा मॉडल सदर अस्पताल से हटाए जा चुके प्रभारी उपाधीक्षक डॉ० एस०के० आजाद और अस्पताल प्रबंधक शिम्पी कुमारी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने स्वास्थ्य मंत्री, बिहार सरकार को आवेदन देकर दोनों अधिकारियों के खिलाफ उच्चस्तरीय विशेष जांच टीम (SIT) के गठन, प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने, चल-अचल संपत्ति की जांच और सेवा से स्थायी बर्खास्तगी की मांग की है। यूनियन के महासचिव मुकुंद कुमार सिंह ने कहा है कि सरकार द्वारा दोनों को पद से हटाना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन उनके गंभीर कृत्यों को देखते हुए केवल पदमुक्त करना पर्याप्त नहीं है।


पत्रकार से दुर्व्यवहार और साक्ष्य मिटाने का गंभीर आरोप 

आवेदन में 12 सितंबर 2026 की घटना का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि मिड-डे मील से बीमार बच्चों की खबर करने गए पत्रकार को कवरेज से रोका गया, उनके साथ हाथापाई की गई तथा माइक व मोबाइल फोन तोड़ दिए गए। आरोप है कि घटना के दौरान जान से मारने की धमकी दी गई और बाद में साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से अस्पताल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को भी डिलीट कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, घटना के बाद चिकित्सक के कमरे से सिगरेट एवं शराब के खाली गिलास मिलने के वीडियो साक्ष्य का हवाला देते हुए अस्पताल जैसे पवित्र परिसर में अनैतिक गतिविधियों पर कड़ा एतराज जताया गया है।


डॉ० एस०के० आजाद पर पुराने चिकित्सा अपराधों व निजी प्रैक्टिस के आरोप 

आवेदन के प्रथम भाग में प्रभारी उपाधीक्षक डॉ० एस०के० आजाद के चिकित्सकीय इतिहास का ब्योरा दिया गया है। उन पर वर्ष 2018 में ऑपरेशन के दौरान मरीज के पेट में 5 इंच चाकू का टुकड़ा छोड़ने और पथरी की ऑपरेशन में एक महिला मरीज का गर्भाशय निकाल देने के गंभीर आरोप हैं। इसके साथ ही, सरकारी सेवा में रहते हुए पंचवटी चौक स्थित मनोरमा मेमोरियल नामक निजी अस्पताल में गैर-कानूनी तरीके से प्राइवेट प्रैक्टिस करने तथा सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को वहां रेफर करने के भी आरोप लगाए गए हैं।


अस्पताल प्रबंधक पर फर्जी डिग्री, शव कांड व वित्तीय गड़बड़ी का आरोप 

आवेदन के दूसरे भाग में अस्पताल प्रबंधक शिम्पी कुमारी पर जून 2017 के चर्चित 'बाइक पर शव ले जाने' के मामले में लापरवाही का दोषी पाए जाने का जिक्र किया गया है। इसके अलावा, उन पर मानव भारती विश्वविद्यालय सोलन से दूरस्थ शिक्षा (Distance Mode) की संदिग्ध प्रोविजनल MBA डिग्री के आधार पर नौकरी प्राप्त करने का आरोप है, जिसमें पद की अनिवार्य योग्यता अनुसार हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन और 2 वर्ष की इंटर्नशिप शामिल नहीं थी। उन पर वित्तीय अनियमितता और वर्ष 2023 में केंद्र सरकार की 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य की मोबाइल मेडिकल यूनिट गायब करने जैसे गंभीर आरोप भी हैं।


SIT जांच, UGC से डिग्री सत्यापन और स्थायी बर्खास्तगी की मांग 

बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने राज्य सरकार से मांग की है कि दोनों अधिकारियों की शैक्षणिक डिग्रियों का विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से गहन सत्यापन कराया जाए। साथ ही, दोनों की चल एवं अचल संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यूनियन ने जोर देकर कहा है कि दोनों के कुकृत्यों के विरुद्ध तत्काल SIT गठित कर आपराधिक प्राथमिकी दर्ज की जाए तथा उन्हें सरकारी सेवा से स्थायी रूप से बर्खास्त किया जाए ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ खिलवाड़ न कर सके।


नरोत्तम की रिपोर्ट