Bihar Politics: सम्राट मे तोड़ दिया श्राप, 56 साल पुराना सियासी वहम टूटा, डिप्टी सीएम से सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे
Bihar Politics: सम्राट चौधरी आज मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही 56 साल पुरानी एक अपशकुनी वहम टूट गया, जो यह धारणा बनाता था कि जो डिप्टी सीएम बन जाता है, वो कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाता।
Bihar Politics: बिहार की सियासत में आज एक नई शुरुआत हुई है। बिहार में अब सम्राट का दौर शुरू हो चुका है। सम्राट चौधरी ने पटना स्थित लोकभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया। उन्हें सम्राट सैयद अता हसनैन ने पद और गोपनीयता की कसम दिलाई। यह पहला मौका है जब भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता बिहार में अपने दम पर मुख्यमंत्री बना है। लेकिन इस सियासी कहानी में असली ट्विस्ट उस अपशकुनी वहम के टूटने का है, जो पिछले 56 सालों से राजनीति के गलियारों में गूंजता रहा कि जो डिप्टी सीएम बनता है, वह कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाता। सम्राट चौधरी ने इस मिथक को चकनाचूर कर दिया है।
बिहार मे अब तक 10 डिप्टी सीएम मिले हैं। अनुग्रह नारायण सिन्हा 11 साल डिप्टी सीएम रहे, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। कर्पूरी ठाकुर के बाद जगदेव प्रसाद, राम जयपाल सिंह यादव, सुशील मोदी, तेजस्वी यादव, तार किशोर प्रसाद, रेणु देवी, और विजय सिन्हा डिप्टी सीएम बने। इतिहास के पन्ने पलटें तो आखिरी बार कर्पूरी ठाकुर ने यह कारनामा किया था। 1967 में डिप्टी सीएम बनने के बाद 1970 में वह पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे थे। उनके बाद दशकों तक यह कुर्सी डिप्टी सीएम के लिए जैसे मना हो गई थी।
कई बड़े नाम इस सियासी बदकिस्मती के शिकार रहे। सुशील मोदी, जो कई बार डिप्टी सीएम बने, मगर मुख्यमंत्री की कुर्सी उनसे दूर ही रही। वहीं तेजस्वी प्रसाद यादव भी दो बार उपमुख्यमंत्री बनने के बावजूद अभी तक उस ताज को हासिल नहीं कर पाए।
सम्राट चौधरी ने दो बार डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी निभाने के बाद आखिरकार सत्ता के शिखर पर छलांग लगा दी। यह सिर्फ एक शपथ नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नया ‘पावर शिफ्ट’ माना जा रहा है जहां पुरानी मान्यताएं टूट रही हैं और नई सियासी इबारत लिखी जा रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट अपने इस नए शासनकाल में बिहार की राजनीति और विकास को किस दिशा में ले जाते हैं।