भ्रष्टाचार पर सम्राट सरकार का बड़ा प्रहार: आय से अधिक संपत्ति मामले में मगध प्रमंडल के सहायक निबंधन महानिरीक्षक मणिरंजन सेवा से बर्खास्त

बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत मगध प्रमंडल के सहायक निबंधन महानिरीक्षक (पूर्व जिला सब रजिस्ट्रार, समस्तीपुर) मणिरंजन को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

आय से अधिक संपत्ति मामले में मगध प्रमंडल के सहायक निबंधन महानिरीक्षक मणिरंजन सेवा से बर्खास्त- फोटो : अनिल कुमार

Patna : बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ राज्य सरकार का सख्त अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार सरकार द्वारा एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मगध प्रमंडल के अवर निबंधक-सह-सहायक निबंधन महानिरीक्षक (तत्कालीन जिला सब रजिस्ट्रार, समस्तीपुर) मणिरंजन को 8 जून 2026 को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जांच आयुक्त की रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है।


आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने दर्ज किया था मुकदमा

गौरतलब है कि मणिरंजन के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) थाना में कांड संख्या-06/2021 दिनांक 16.12.2021 दर्ज किया गया था। यह मामला भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 (यथा संशोधित 2018) और भादवि की विभिन्न धाराओं के तहत आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोपों में दर्ज हुआ था। अनुसंधान के दौरान पाया गया कि उन्होंने समस्तीपुर और बिहार के विभिन्न स्थानों पर पदस्थापित रहते हुए भ्रष्ट तरीकों से ₹1,62,36,926 (एक करोड़ बासठ लाख रुपये से अधिक) की अवैध संपत्ति बनाई थी।


पटना-मुजफ्फरपुर में मिले आलीशान फ्लैट, जमीन और लाखों का कैश

अनुसंधान और छापेमारी के दौरान मणिरंजन के ठिकानों से अकूत अचल संपत्ति का खुलासा हुआ था। उनके पास मुजफ्फरपुर के एक नामी मॉल में दुकान, पटना की ज्योतिपुरम कॉलोनी में ₹1.03 करोड़ की कीमती जमीन, पटना के ही पाटलीग्राम अपार्टमेंट में एक आलीशान फ्लैट और कटिहार में जमीन पाई गई थी। इसके अतिरिक्त, छापेमारी के वक्त मणिरंजन के आवास से ₹38,93,200 की भारी-भरकम नगद राशि भी बरामद की गई थी, जिसका वे कोई वैध स्रोत नहीं बता सके थे।


विभागीय जांच में सरकारी सेवक नियमावली के उल्लंघन का दोषी

भ्रष्टाचार के इस बड़े खुलासे के बाद विभाग ने संकल्प संख्या-2792 दिनांक 02.06.2022 के माध्यम से मणिरंजन के खिलाफ नियमित विभागीय कार्यवाही शुरू की थी। जांच आयुक्त द्वारा पूरे मामले की गहनता से पड़ताल की गई, जिसके बाद प्राप्त प्रतिवेदन (जांच रिपोर्ट) में मणिरंजन का आचरण 'बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976' के प्रावधानों के पूरी तरह विपरीत पाया गया। आरोपों के शत-प्रतिशत प्रमाणित होने के बाद सरकार ने उन्हें नौकरी से निकालने का फैसला किया।


भ्रष्ट अधिकारियों में मचा हड़कंप, जारी रहेगी कार्रवाई

बिहार सरकार की इस बेहद सख्त और दंडात्मक कार्रवाई से निबंधन विभाग सहित सूबे के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। सरकार ने इस बर्खास्तगी के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि लोकसेवकों द्वारा पद का दुरुपयोग कर जनता की गाढ़ी कमाई लूटने और काली कमाई जमा करने के मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, भ्रष्टाचार के रडार पर आए कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी आने वाले दिनों में ऐसी ही सख्त विभागीय और कानूनी गाज गिर सकती है।


अनिल की रिपोर्ट