Patna Sanitation Strike: पटना कूड़े के ढेर में दफ़्न, 8वें दिन भी सफाई कर्मियों की हड़ताल जारी, 900 टन कचरे से बदहाल राजधानी,3 मांगों पर बनी सहमति!
Patna Sanitation Strike: राजधानी पटना में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नगर निगम के सफाई कर्मियों और दैनिक मजदूरों की हड़ताल गुरुवार को लगातार आठवें दिन भी जारी है...
Patna Sanitation Strike: राजधानी पटना में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नगर निगम के सफाई कर्मियों और दैनिक मजदूरों की हड़ताल गुरुवार को लगातार आठवें दिन भी जारी है, जिससे पूरा शहर कूड़े के ढेर में तब्दील होता नजर आ रहा है। सड़कों, गलियों, बाजारों और रिहायशी मोहल्लों में गंदगी का अंबार लग गया है। लगातार हो रही बारिश ने हालात को और भी बदतर बना दिया है। जगह-जगह सड़ता कचरा, उठती बदबू और जलजमाव ने आम लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।
हड़ताल खत्म कराने के लिए पटना नगर निगम ने सफाई कर्मियों की तीन प्रमुख मांगों पर सहमति जता दी है। बुधवार शाम मेयर की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया, जिसे अब राज्य सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। पहली मांग नगर निकायों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने की है। सफाई कर्मियों का कहना है कि स्थायी प्रकृति के कार्य को निजी एजेंसियों के हवाले करने से उनका लगातार शोषण हो रहा है। निगम ने सरकार से अनुरोध करने का फैसला लिया है कि नगर निगम को अपने स्तर पर सफाई कर्मियों के नियमितीकरण की अनुमति दी जाए।
दूसरी मांग सभी दैनिक सफाई कर्मियों को स्थायी सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की है। कर्मचारियों का तर्क है कि वर्ष 2018 में 118 दैनिक सफाई कर्मियों का नियमितीकरण किया गया था, तो अब बाकी कर्मियों को इससे वंचित रखना नाइंसाफी है। निगम का कहना है कि जो कर्मचारी निर्धारित मानकों पर पात्र होंगे, उन्हें योजना का लाभ देने का प्रयास किया जाएगा।
तीसरी मांग समान वेतन, एसीपी और एमएसीपी जैसी लंबित सुविधाओं को बहाल करने तथा वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करने की है। नगर निगम ने इस संबंध में विभागीय रोक हटाने के लिए सरकार को पत्र भेजने का आश्वासन दिया है।हालांकि, सफाई कर्मी फिलहाल अपने रुख पर कायम हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मोहन पासवान ने कहा कि यह लड़ाई केवल वेतन की नहीं, बल्कि सम्मान, अधिकार और स्थायी पहचान की है। वहीं हड़ताल में शामिल सफाईकर्मी कांति देवी ने कहा कि वर्षों से शहर की सफाई करने के बावजूद उन्हें आज भी अस्थायी मजदूर की तरह देखा जाता है।
नगर निगम के मुताबिक पिछले सात दिनों में 900 टन से अधिक कचरा शहर की सड़कों और डंपिंग प्वाइंट पर जमा हो चुका है। कंकड़बाग, राजेंद्र नगर, बोरिंग रोड, पटना सिटी, अशोक राजपथ, कदमकुआं, गर्दनीबाग, अनीसाबाद और बेली रोड समेत कई इलाकों में कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लगे हैं। कई जगहों पर हालात ऐसे हैं कि कचरे के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं। अब सबकी निगाहें सरकार और सफाई कर्मियों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हैं, क्योंकि जब तक हड़ताल खत्म नहीं होती, राजधानी को गंदगी से राहत मिलना मुश्किल दिखाई दे रहा है।