सारण: माही नदी का तटबंध टूटने पर पुलिस का अनोखा रूप, DSP ने खुद संभाला राहत कार्य
वर्दी का असली गौरव कागजी आदेशों में नहीं, बल्कि जनता के आंसुओं को पोछने में है। सारण के दिघवारा में माही नदी का तटबंध टूटने पर DSP मुख्यालय अभिषेक कुमार खुद मूसलाधार बारिश में कंधे पर बांस उठाकर राहत कार्य में जुट गए। खाकी के इस मानवीय चेहरे को सलाम
बिहार में बाढ़ का प्रकोप जारी है और प्रशासनिक अमला लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। इस बीच, सारण जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने खाकी वर्दी के असली मायने और मानवीय चेहरे को उजागर कर दिया है। डीएसपी मुख्यालय अभिषेक कुमार का यह कदम पूरे पुलिस महकमे के लिए कर्तव्यनिष्ठा की एक अनूठी मिसाल बन गया है।
माही नदी का तटबंध टूटने से उपजा संकट
सारण जिले के दिघवारा प्रखंड अंतर्गत त्रिलोकचक गांव स्थित माही नदी का तटबंध अचानक टूट गया। मूसलाधार बारिश और उफनते पानी के बीच ग्रामीणों का जीवन खतरे में पड़ गया। ऐसे आपदा के समय खाकी केवल एक वर्दी न रहकर संकट में फंसे लोगों के लिए एक मजबूत सहारा बन गई।
अधिकारियों की मुस्तैदी और जन-विश्वास का कवच
कटाव तेज होने की सूचना मिलते ही स्थिति भयावह हो चुकी थी। संकट की इस घड़ी में डीएसपी मुख्यालय अभिषेक कुमार, जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और वरीय पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। बारिश और पानी के तेज बहाव की परवाह किए बिना अधिकारी सीधे जमीनी मोर्चे पर उतर आए।
कंधे पर बांस और खुद भींगकर राहत कार्य
उच्च पुलिस अधिकारी का खुद पानी में उतरना और कंधे पर बांस लादकर कटाव स्थल की मरम्मत व रेस्क्यू कार्य में जुट जाना देख ग्रामीणों का हौसला बढ़ गया। यह दृश्य उन धारणाओं का करारा जवाब था जो प्रशासनिक अमले को केवल एसी कमरों तक सीमित मानती हैं। इस समर्पण ने जनता के मन में महकमे के प्रति सम्मान की एक नई लकीर खींच दी।
कर्तव्यनिष्ठा और नेतृत्व का नया उदाहरण
खाकी का वजन केवल कंधों पर लगे स्टार्स से नहीं, बल्कि आपदा में जनता के साथ खड़े होने के जज्बे से तौला जाता है। जब नेतृत्व खुद आगे बढ़कर कार्य करता है, तो मातहतों और स्थानीय युवाओं का मनोबल अपने आप बढ़ जाता है। त्रिलोकचक के लोगों के लिए यह घटना साबित करती है कि खाकी आज भी इंसानियत की सबसे मजबूत दीवार है।
सारण से धर्मेन्द्र रस्तोगी की रिपोर्ट