शिक्षक दिवस 2026: मांझी की तीन शिक्षिकाओं को मिला 'श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान', बेहतर शिक्षा के लिए हुईं सम्मानित
शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर सारण (मांझी) के दो विद्यालयों की तीन शिक्षिकाओं—सीमा कुमारी, कुमारी आसन एजाज और मंजू कुमारी को बेहतर पठन-पाठन के लिए 'श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान 2026' से सम्मानित किया गया।
सारण जिले के मांझी प्रखंड में शिक्षक दिवस के अवसर पर उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान देने वाली तीन शिक्षिकाओं को 'श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान 2026' से सम्मानित किया गया। वर्षभर विद्यार्थियों के बीच बेहतर पठन-पाठन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कन्या प्राथमिक विद्यालय (गुबराही टोला) की शिक्षिका सीमा कुमारी व कुमारी आसन एजाज तथा सृजित प्राथमिक विद्यालय (गढ़वा टोला) की शिक्षिका मंजू कुमारी को यह सम्मान दिया गया।
कन्या प्राथमिक विद्यालय गुबराही टोला में शिक्षिकाएं सम्मानित
कन्या प्राथमिक विद्यालय, गुबराही टोला में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्रधान शिक्षक बीके भारतीय ने शिक्षिका सीमा कुमारी और कुमारी आसन एजाज को प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया। उन्होंने दोनों शिक्षिकाओं के समर्पण और प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इस मौके पर विद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
सृजित प्राथमिक विद्यालय गढ़वा टोला में मंजू कुमारी को सम्मान
इसी क्रम में मांझी प्रखंड के सृजित प्राथमिक विद्यालय, गढ़वा टोला में भी एक गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। यहां प्रभारी प्रधानाध्यापक गजेंद्र कुमार सिंह ने शिक्षिका मंजू कुमारी को विद्यालय में बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन और बच्चों के सर्वांगीण विकास में उनके योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिह्न भेंटकर 'श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान 2026' से नवाजा।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम का शुभारंभ देश के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों छात्र-छात्राओं के साथ बड़ी संख्या में अभिभावक और स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे। उपस्थित लोगों ने डॉ. राधाकृष्णन के आदर्शों पर चलने और शिक्षा के महत्व को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
शिक्षक ही करते हैं राष्ट्र और समाज का निर्माण
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधान शिक्षक बीके भारतीय ने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बाद भी स्वयं को गर्व से एक शिक्षक मानते थे। शिक्षकों का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि बच्चों के चरित्र और भविष्य को संवारना है। शिक्षक ही नई पीढ़ी का मार्गदर्शन कर समाज और राष्ट्र निर्माण में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं।
सारण से धर्मेन्द्र रस्तोगी की रिपोर्ट