शिक्षा विभाग के कई अफसरों पर गिरी गाज, मंत्री मिथिलेश तिवारी के निर्देश पर डीपीओ के सेवा से बर्खास्त करने की अनुशंसा समेत कई पर सख्त कार्रवाई

शिक्षा विभाग में कर्तव्य के प्रति लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सरकार ने बड़ा प्रशासनिक हंटर चलाया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के निर्देश पर विभाग के छह बड़े अधिकारियों के खिलाफ एक साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है....

शिक्षा विभाग के कई अफसरों पर गिरी गाज- फोटो : सोशल मीडिया

Patna : बिहार के शिक्षा विभाग में कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने विभागीय समीक्षा के बाद सोमवार को विभाग के छह बड़े अधिकारियों के खिलाफ एक साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई का बड़ा फैसला लिया है। इस बड़ी कार्रवाई के तहत जहां एक महिला प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है, वहीं कुछ अधिकारियों के वेतन-पेंशन से कटौती और उनकी सालाना वेतन वृद्धि (इन्क्रीमेंट) पर रोक लगाने की भी गंभीर अनुशंसा की गई है। शिक्षा मंत्री के इस कड़े फैसले से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।


तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारियों पर भ्रष्टाचार और नियुक्ति में गड़बड़ी का आरोप, कार्रवाई के आदेश जारी

विभागीय आदेश के अनुसार, बांका के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) पवन कुमार पर कार्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने का आरोप सिद्ध हुआ है, जो वर्तमान में पूर्वी चंपारण में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। वहीं, शिक्षकों की बहाली में बड़े पैमाने पर की गई अनियमितता के गंभीर आरोप में सुपौल के तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी रामाशीष महतो को भी इस अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया गया है। इसके अलावा, बांका के ही एक और तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी देवेन्द्र कुमार झा, जो वर्तमान में सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) हो चुके हैं, पर भी पद पर रहते हुए वित्तीय अनियमितता करने का आरोप है और उनके खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


भोजपुर के तत्कालीन डीपीओ मो. इरशाद अंसारी को सेवा से बर्खास्त करने की मजबूत अनुशंसा

इस पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ी गाज भोजपुर के तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान) मो. इरशाद अंसारी पर गिरी है। अंसारी पर पद का दुरुपयोग करने और बड़े पैमाने पर वित्तीय हेरफेर व अनियमितता करने का संगीन आरोप है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने उन्हें नौकरी से सीधे बर्खास्त (सेवा से निष्कासित) करने की मजबूत अनुशंसा की है। इसके साथ ही, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के तत्कालीन सचिव राजेश कुमार भी इस कार्रवाई से नहीं बच सके हैं; उन पर अपने आधिकारिक दायित्वों और कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही बरतने का दोष साबित हुआ है।


अवैध वसूली के आरोप में मधेपुर की महिला बीईओ मरजीना खातून सस्पेंड, अलग-अलग तिथियों से प्रभावी होगा आदेश

कार्रवाई की जद में आई अधिकारियों में मधुबनी जिले के मधेपुर की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) मरजीना खातून भी शामिल हैं। महिला अधिकारी पर स्कूली छात्रों के विद्यालय परित्याग प्रमाण पत्र (SLC/CLC) पर प्रतिहस्ताक्षर (काउंटर-साइन) करने के एवज में अवैध रूप से अवैध राशि (रिश्वत) वसूलने का बेहद गंभीर आरोप है। भ्रष्टाचार के इस मामले में मंत्री के निर्देश पर उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया है और उनके निलंबन का यह आदेश आगामी 18 मई से प्रभावी माना जाएगा। वहीं, विभाग के अन्य पांच दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का मुख्य आदेश 8 मई 2026 से प्रभावी रूप से लागू होगा।


शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, सुशासन की दिशा में बड़ा कदम

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी द्वारा की गई इस चौतरफा कार्रवाई ने यह साफ संदेश दे दिया है कि शिक्षा विभाग के भीतर किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, घूसखोरी और फाइलों व कार्यों में लापरवाही को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य बच्चों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील विभाग में पूरी तरह से पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना है। स्थानीय स्तर पर आम जनता और बुद्धिजीवियों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे प्रखंड से लेकर जिला स्तर के कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार और बाबूशाही पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।


अभिजीत की रिपोर्ट