Bihar News : नीतीश के 'अंदर सोये गांधी' पर शिवानंद तिवारी का तंज: शराबबंदी को बताया बिना सोचे-समझे लिया गया 'राजसी' फैसला
Bihar News : पूर्व मंत्री और बिहार के कद्दावर नेता शिवानंद तिवारी ने शराबबंदी पर सवाल खड़े किये है. उन्होंने इसे सीएम नीतीश का राजसी फैसला बताया है........पढ़िए आगे
PATNA : बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और कद्दावर नेता शिवानंद तिवारी ने शराबबंदी कानून को लेकर उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र यादव के हालिया बयान पर तीखा प्रहार किया है। दरअसल, डिप्टी सीएम ने शराबबंदी के उल्लंघन की तुलना इंग्लैंड के कानूनों से करते हुए इसे वापस न लेने की बात कही थी। इस पर पलटवार करते हुए शिवानंद तिवारी ने कहा कि कानून का उल्लंघन होना और कानून का अपने उद्देश्य में विफल होना दो अलग बातें हैं। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि अच्छे मकसद से बने कानून अगर सफल न हों, तो उनमें संशोधन करना या वापस लेना अपमानजनक नहीं बल्कि बुद्धिमानी है।
शिवानंद तिवारी ने कहा की विजेंदर भाई को एक जानकारी देना चाहूंगा। 1920 में अमेरिका में भी शराब बंदी क़ानून लागू हुआ था। लेकिन 1933 में उसको वापस लेना पड़ा। अवैध शराब के कारोबार में शक्तिशाली अपराधी गिरोहों का उदय हो गया। वहाँ अपराधियों का गिरोह कैसे काम करता है उस पर मारियो पूजो का लिखा 'गॉड फादर' उपन्यास है जिस पर फिल्म भी बनी है। दुनिया भर में अच्छे मक़सद के लिए क़ानून बनाए जाते हैं। लेकिन अगर उक्त क़ानून से वह मक़सद हासिल नहीं होता है तो उसमें संशोधन करने या उसे वापस लेना अपमानजनक नहीं बल्कि बुद्धिमानी का काम माना जाता है।
तिवारी ने कहा की बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बनने के बाद मौजूदा मद्यनिषेध क़ानून कैसे बना, उसका संदर्भ क्या था यह जानना बहुत दिलचस्प है। नीतीश कुमार जब मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने सरकार का राजस्व बढ़ाने का अभियान चलाया। उस समय उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग से राज्य को लगभग 300 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था। कुछ ही वर्षों में यह बढ़कर 3000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी अपने आप में नज़ीर है कि नीतीश कुमार ने बिहार में किस हद तक शराब को बढ़ावा दिया। गांव-गांव में भट्टियां खुलीं और सामाजिक हालात ऐसे बने कि महिलाओं का घर से निकलना तक मुश्किल होने लगा। जब महिलाओं का व्यापक विरोध सामने आया, तब शुरुआत में नीतीश कुमार की ओर से यही तर्क दिया गया कि लड़कियों के लिए साइकिल, पोशाक और अन्य योजनाओं के लिए पैसा कहां से आएगा!
तिवारी ने तंज कसते हुए कहा की अचानक एक दिन नीतीश कुमार के अंतर में सोये गांधी जी जागे। उन्होंने बिहार में देशी शराब को प्रतिबंधित कर दिया। लेकिन इस फ़ैसले के लिए विशेषज्ञों की कोई कमिटी नहीं बनी। राजस्व की हानि होगी तो उसकी भरपाई कैसे होगी। इस पर कोई विचार नहीं हुआ। यहाँ तक कि इस निर्णय पर पहुँचने के लिए विभाग की भी कोई कमिटी नहीं बनायी गई। इस मामले में नीतीश कुमार का बर्ताव एक राजा की तरह था। जिस तरह शराब बंदी क़ानून पर नीतीश कुमार ने निर्णय लिया वह भी साबित करता है कि वह कोई सुविचारित और सुचिंतित निर्णय नहीं था। पहले देसी शराब पर प्रतिबंध लगाया गया, और कुछ ही दिनों बाद संपूर्ण शराबबंदी की घोषणा कर दी गई। इस घटनाक्रम में कोई सुविचारित नीति नहीं दिखाई देती है। बल्कि यह एक तात्कालिक और मनमाना निर्णय जैसा था।
शिवानंद तिवारी ने कहा की आज ज़रूरत किसी के बचाव या कोई उदाहरण देने की नहीं है, बल्कि ईमानदार आत्ममंथन की है। सरकार को चाहिए कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष कमेटी गठित करे, जो बिना किसी राजनीतिक दबाव के जमीनी सच्चाई का अध्ययन करे और स्पष्ट रूप से बताए कि शराबबंदी अपने उद्देश्य में कितनी सफल रही है या इसमें किसी संशोधन की ज़रूरत है! उसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की नीति तय होनी चाहिये.