Bihar fake teacher: बिहार में शिक्षकों का फर्जीवाड़ा! फेक सर्टिफिकेट के दम पर 20 सालों से कर रही थी नौकरी, पता चलने पर पकड़ाई, जानें पूरा मामला

Bihar fake teacher: सीतामढ़ी जिले में फर्जी सर्टिफिकेट पर बहाल दो शिक्षिकाएं और एक शिक्षक विजिलेंस जांच में पकड़े गए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्राथमिकी की कार्रवाई शुरू।

फर्जी शिक्षक मामले की विजिलेंस जांच- फोटो : social media

Bihar fake teacher:  सीतामढ़ी जिले में फर्जी शिक्षक नियोजन घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। विजिलेंस जांच के दौरान फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर बहाल दो शिक्षिकाएं और एक शिक्षक पकड़े गए हैं। हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अवैध प्रमाणपत्रों पर नौकरी कर रहे शिक्षकों पर अब कानून का शिकंजा कसता दिख रहा है। विजिलेंस विभाग ने संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मामला न केवल शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वर्षों से फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी करने वाले अब भी कार्रवाई से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

विजिलेंस जांच में एक-एक कर हो रहे फर्जी शिक्षक बेनकाब

हाईकोर्ट के आदेश पर विजिलेंस विभाग की तरफ से वर्ष 2006 से 2015 तक नियोजित शिक्षकों और शिक्षिकाओं के प्रमाणपत्रों की वैधता की गहन जांच की जा रही है। इस जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक पद पर कार्यरत व्यक्ति योग्य और वैध प्रमाणपत्रधारी हों। जांच के दौरान यह सामने आया कि बड़ी संख्या में शिक्षक फर्जी मैट्रिक, मध्यमा और इंटरमीडिएट प्रमाणपत्रों के आधार पर बहाल हुए थे। पहले ही राज्य भर में 105 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। इसके बावजूद कई शिक्षक स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने को तैयार नहीं हुए, जिससे कानूनी कार्रवाई अपरिहार्य हो गई।

हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश, फिर भी नहीं छोड़ी नौकरी

हाईकोर्ट ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि जो शिक्षक स्वेच्छा से नौकरी छोड़ देंगे, उनके खिलाफ न तो कानूनी कार्रवाई होगी और न ही वेतन की वसूली की जाएगी। लेकिन इसके उलट, बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक सामने आए जिन्होंने अवैध बहाली के बावजूद पद छोड़ने से इनकार कर दिया। अदालत के निर्देशों की अवहेलना करना अब इन शिक्षकों के लिए भारी पड़ रहा है। विजिलेंस विभाग ने साफ कर दिया है कि नौकरी नहीं छोड़ने वालों के खिलाफ एफआईआर के साथ-साथ वेतन वसूली भी की जाएगी।

परसौनी प्रखंड का मामला

परसौनी प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय आनंदी साह डेरा, देमा में कार्यरत पंचायत शिक्षिका कुमारी आरती रानी का मध्यमा अंकपत्र बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड से सत्यापन के दौरान फर्जी पाया गया। वे वर्ष 2006 में बहाल हुई थीं। विजिलेंस ने परसौनी थानाध्यक्ष को उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आवेदन भेजा है।

बोखड़ा प्रखंड का मामला

बोखड़ा प्रखंड के मध्य विद्यालय भाउरगढ़ में कार्यरत शिक्षिका रूना पासवान, जिनकी नियुक्ति भी वर्ष 2006 में हुई थी, उनका मध्यमा अंकपत्र भी फर्जी निकला। उनके सभी दस्तावेज डीपीओ (स्थापना) द्वारा विजिलेंस को उपलब्ध कराए गए थे, जिनकी जांच में यह खुलासा हुआ।

बेलसंड प्रखंड के शिक्षक का इंटर प्रमाणपत्र भी निकला फर्जी

तीसरा मामला बेलसंड प्रखंड से सामने आया है। यहां के प्रखंड शिक्षक सुधांशु कुमार, जो वर्तमान में मध्य विद्यालय कंसार में पदस्थापित हैं, उनका इंटरमीडिएट का अंकपत्र सत्यापन के दौरान फर्जी पाया गया। उनकी बहाली भी वर्ष 2006 में हुई थी। विजिलेंस ने बेलसंड थानाध्यक्ष को आवेदन भेजकर उनके खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की है।