Bihar Road Safety:रफ्तार पर लगेगी लगाम, परिवहन विभाग का हादसों से बचने का नया फॉर्मूला, जानिए क्या बदला

Bihar Road Safety: बिहार की सियासत अब सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रही, बल्कि ज़मीनी हकीकत पर भी असर डालती नजर आ रही है।...

हादसों से बचने का नया फॉर्मूला- फोटो : social Media

Bihar Road Safety: बिहार की सियासत अब सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रही, बल्कि ज़मीनी हकीकत पर भी असर डालती नजर आ रही है।सरकार ने ग्रामीण इलाकों में सड़क सुरक्षा को लेकर ऐसा कदम उठाया है, जिसने गांव और शहर के बीच का फासला कम करने की कोशिश की है। लोगों की हिफाजत को मद्देनज़र रखते हुए सूबे के सभी 38 जिलों में 26,031 जेब्रा क्रॉसिंग का निर्माण मुकम्मल कर लिया गया है।

यह फैसला खास तौर पर उन जगहों पर अमल में लाया गया है, जहां आम लोगों की आवाजाही ज्यादा होती है जैसे स्कूल, अस्पताल और अन्य अहम मकाम। सरकार का दावा है कि इससे पैदल चलने वालों को सड़क पार करने में सहूलियत मिलेगी और हादसों में कमी आएगी। सियासी हलकों में इसे पब्लिक सेफ्टी का बड़ा दांव माना जा रहा है।

ग्रामीण कार्य विभाग ने इस पूरी मुहिम को एक मिशन की तरह अंजाम दिया है। महज निर्माण ही नहीं, बल्कि जेब्रा क्रॉसिंग की नियमित निगरानी और निरीक्षण का भी बंदोबस्त किया गया है, ताकि क्वालिटी और असर दोनों बरकरार रहें। अफसरान को साफ हिदायत है कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

साथ ही, जिन इलाकों को हादसों के लिहाज से संवेदनशील माना गया है, वहां रम्बल स्ट्रिप और स्पीड कंट्रोल जैसे इंतजाम भी किए गए हैं। इसका मकसद साफ है तेज रफ्तार पर लगाम और इंसानी जान की हिफाजत। यह कदम सरकार की ग्राउंड कनेक्ट पॉलिसी को मजबूत करता है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल कितनी कारगर साबित होती है और क्या वाकई गांवों में सड़क हादसों का ग्राफ नीचे आता है। फिलहाल,सरकार  का यह कदम अवाम के बीच एक सकारात्मक पैगाम जरूर दे रहा है कि सुरक्षा अब सिर्फ शहरों का हक नहीं, गांवों की भी जरूरत है।