सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए पटना में राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन: पीएम राहत योजना के तहत 1.50 लाख तक का मिलेगा कैशलेस इलाज

पीएम (PM) राहत योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के दौरान जानकारी दी गई कि इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल पात्र पीड़ितों को 7 दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक कैशलेश ..

सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए पटना में कार्यशाला का आयोजन- फोटो : धीरज पराशर

Patna : सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को त्वरित और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा पीएम (PM) राहत योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को पटना के अधिवेशन भवन में एक राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्घाटन पुलिस महानिदेशक (संचार एवं तकनीकी सेवाएं) अमित लोढ़ा, परिवहन सचिव राज कुमार और राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन ने संयुक्त रूप से किया।


योजना के तहत 1.50 लाख रुपये तक का मुफ्त और कैशलेस उपचार

कार्यशाला के दौरान जानकारी दी गई कि पीएम राहत योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना में घायल पात्र पीड़ितों को अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसका मुख्य उद्देश्य दुर्घटना के बाद के शुरुआती और बेहद महत्वपूर्ण समय (गोल्डेन ऑवर) में घायल व्यक्ति को बिना किसी आर्थिक बाधा के तुरंत आवश्यक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराना है।


स्वास्थ्य और परिवहन सचिव ने आपसी समन्वय और जागरूकता पर दिया जोर

स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने कहा कि 'गोल्डेन ऑवर' यानी दुर्घटना के पहले एक घंटे के भीतर घायल को अस्पताल पहुंचाकर बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकती हैं। उन्होंने सभी अस्पतालों से सड़क दुर्घटना पीड़ितों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने की अपील की। वहीं, परिवहन सचिव श्री राज कुमार ने कहा कि योजना के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए सभी संबद्ध अस्पतालों में बोर्ड लगाए जाएंगे और हाईवे के किनारे होर्डिंग अधिष्ठापित किए जाएंगे ताकि लोगों को इसकी पूरी जानकारी मिल सके।


पुलिस, स्वास्थ्य और परिवहन विभाग के अधिकारियों की रही सहभागिता

योजना के प्रावधानों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न स्टेकहोल्डर्स जैसे आयुष्मान भारत से इम्पैनल्ड अस्पतालों के प्रतिनिधि, थानों के थाना प्रभारी, यातायात पुलिस पदाधिकारी, डायल 112 के कर्मी, स्वास्थ्य और परिवहन विभाग के अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान दुर्घटना पीड़ितों के पंजीकरण, सत्यापन, उपचार, क्लेम प्रक्रिया और TMS 2.0 पोर्टल के इस्तेमाल पर विस्तार से चर्चा की गई।


बेहतर समन्वय और गूगल मैप पर अस्पतालों की जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश

कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सड़क दुर्घटनाएं आमतौर पर राजमार्गों के किनारे होती हैं, इसलिए आम लोगों को आसपास उपलब्ध पीएम राहत से संबद्ध अस्पतालों की जानकारी आसानी से मिलनी चाहिए। इसके लिए अस्पतालों की सूची गूगल मैप पर भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि आपात स्थिति में त्वरित मदद मिल सके।


धीरज पराशर की रिपोर्ट