150 करोड़ भारतीयों का स्वाभिमान सर्वोपरि : अमेरिका की 'अनुमति' वाली टिप्पणी पर भड़के तेजस्वी यादव, पीएम मोदी से की बड़ी मांग

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका द्वारा दी गई 'अनुमति' की खबर पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से भारत की संप्रभुता स्पष्ट करने की मांग की है।

Patna - आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के जरिए मोदी सरकार को विदेशी नीति के मोर्चे पर घेरा है। अमेरिकी बयान का हवाला देते हुए तेजस्वी ने कहा कि भारत जैसे महान देश को अपनी ऊर्जा जरूरतों और व्यापार के लिए किसी दूसरे देश की "अनुमति" की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत एक सक्षम और स्वतंत्र राष्ट्र है और उसे दुनिया को यह कड़ा संदेश देना चाहिए। 

"भारत किसी का मोहताज नहीं"

तेजस्वी यादव ने अपने Facebook पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी 150 करोड़ स्वाभिमानी भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में उन्हें तुरंत प्रभाव से यह स्पष्ट करना चाहिए कि भारत के फैसले बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होते। उन्होंने सवाल उठाया कि एक संप्रभु राष्ट्र होने के नाते भारत को किसी दूसरे देश की शर्तों या "अनुमति" का मोहताज क्यों होना चाहिए?

राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखने की सलाह

बदलती वैश्विक राजनीति का जिक्र करते हुए तेजस्वी ने कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखना होगा। उन्होंने कहा कि तेल खरीद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर हमारे फैसले दूरदर्शी और स्वतंत्र होने चाहिए। भारत की नीति किसी बाहरी एजेंडे से नहीं, बल्कि भारत के लोगों के हितों से तय होनी चाहिए।

पीएम मोदी को मजबूती से पक्ष रखने की चुनौती

तेजस्वी ने सीधे प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि एक मजबूत प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें वैश्विक मंच पर भारत की आत्मा और स्वाभिमान को मजबूती के साथ व्यक्त करना होगा। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीति का विषय नहीं है, बल्कि देश के आत्मसम्मान और संप्रभुता का सवाल है, जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

कूटनीतिक हलकों में हलचल

तेजस्वी यादव के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है। जहाँ विपक्षी दल इसे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति के कमजोर होने के रूप में देख रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया आने की उम्मीद है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत द्वारा रूस से तेल खरीदना शुरू से ही अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र रहा है।

Report - Ranjan kumar