Bihar Politics : ‘वो अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन, उसे एक ख़ूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा’, शिवानंद तिवारी का अंदाज़, कहा- इस तरह केसी त्यागी ने ‘त्यागा’ जदयू

PATNA : जदयू के शुरूआती दौर से साथ रहे केसी त्यागी ने अब पार्टी का दामन छोड़ दिया है। वे अब राष्ट्रीय लोक दल में शामिल हो गए हैं। पूरे प्रकरण को लेकर राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने अपनी यादें सोशल मीडिया में शेयर की है। उनके मुताबिक केसी त्यागी के जदयू छोड़ना प्रसिद्ध शायर और गीतकार साहिर लुधियानवी के उस शेर से मेल खाता है, जिसमें उन्होंने कहा था की ‘वो अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन, उसे एक ख़ूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा।‘ यह पंक्तियां दर्शाती हैं कि जब किसी रिश्ते या कहानी को सुखद अंत तक ले जाना असंभव हो, तो उसे बेवजह खींचने के बजाय सम्मानजनक ढंग से समाप्त करना बेहतर है।  

शिवानंद तिवारी ने लिखा की केसी त्यागी और नीतीश कुमार की जोड़ी अब बिछड़ चुकी है। त्यागी लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों के सदस्य रहे, और उनकी राजनीतिक यात्रा जयप्रकाश आंदोलन से लेकर चौधरी चरण सिंह और शरद यादव जैसे नेताओं के साथ गहरे जुड़ाव से होकर गुज़री है। त्यागी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी संवाद की शैली रही है। किस्सागोई में माहिर हैं—पुराने दौर की राजनीति के प्रसंगों को इस तरह सुनाते हैं कि सामने वाला मंत्रमुग्ध हो जाए। शेर-ओ-शायरी में भी उनका कोई जवाब नहीं। संसद के सेंट्रल हॉल में उन्हें कभी अकेले बैठा नहीं देखा गया—हमेशा चार-पाँच लोगों का घेरा, दोस्तपरस्ती उनकी पहचान रही है।

दूसरी ओर नीतीश कुमार का अपना अलग मिजाज है। वे ऐसे नेता हैं जो असहमति सुनना नहीं पसंद करते हैं. उनके विचारों से असहमति रखने वालों के लिए उनके साथ टिके रहना आसान नहीं होता। लेकिन इसके बावजूद त्यागी की जोड़ी नीतीश कुमार के साथ वर्षों तक जमकर चली. बिहार से राज्यसभा में भी गए। यह उनके कौशल का ही प्रमाण है। शिवानंद तिवारी लिखते हैं की अब परिस्थितियाँ बदली हैं। त्यागी का कहना है कि उन्होंने नीतीश की पार्टी से इस्तीफ़ा नहीं दिया है. बल्कि पार्टी की सदस्यता  का नवीनीकरण नहीं कराया है। कितनी महिनी है त्यागी जी में ! अब वे राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हो गए हैं. इसके पीछे की असल वजह क्या है यह तो समय ही बताएगा। 

शिवानंद तिवारी के मुताबिक एक मर्तबा केसी त्यागी ने नीतीश कुमार के लिए कहा था--"जैसे हवा को कोई मुट्ठी में बंद नहीं कर सकता, जैसे फूलों की सुगंध को कोई फैलने से नहीं रोक सकता। वैसे ही नीतीश कुमार के सुशासन और उनके विचारों की गूंज को बिहार की सीमाओं में कैद नहीं किया जा सकता।”कसीदाकारी की इंतहा है। इस मामले में केसी का मुक़ाबला कौन कर सकता है ! नीतीश कुमार के साथ केसी त्यागी के रिश्ते का राज भी यही है।