NSMCH बिहटा में दो दिवसीय ‘फॉरेंसिक जूरिसकॉन 2026’ का आयोजन: मुख्य अतिथि राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा- ‘प्राकृतिक आपदाओं और न्याय दिलाने में फॉरेंसिक की भूमिका अहम’

23 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बिहटा के अमहारा में स्थित नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल के सभागार में दो दिवसीय बिहार-झारखंड राज्यस्तरीय फॉरेंसिक सम्मेलन "फॉरेंसिक जूरिसकॉन 2026" का गरिमामयी आयोजन किया गया.....

NSMCH बिहटा में दो दिवसीय ‘फॉरेंसिक जूरिसकॉन 2026’ का आयोजन- फोटो : सुमित कुमार

Patna : बिहटा के अमहारा में स्थित नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल के सभागार में दो दिवसीय बिहार-झारखंड राज्यस्तरीय फॉरेंसिक सम्मेलन "फॉरेंसिक जूरिसकॉन 2026" का गरिमामयी आयोजन किया गया। 23 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित इस राज्यस्तरीय सम्मेलन में देशभर से 250 से अधिक डॉक्टरों, फॉरेंसिक विशेषज्ञों, चिकित्सा छात्रों और फैकल्टी मेंबर्स ने भाग लिया।


राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने मुख्य अतिथि के रूप में किया संबोधित

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने फॉरेंसिक पर आधारित विशेष पुस्तक का लोकार्पण किया। राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और दीप प्रज्वलन के साथ सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ संस्थान के प्रबंध निदेशक कृष्ण मुरारी, आईएएफएम प्रेसिडेंट प्रो. सी. बी. जैनी, प्राचार्य प्रो. डॉ. हरिहर दीक्षित, डॉ. नवीन कुमार और डॉ. अरविंद प्रसाद द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।


'आपदाओं में शवों की पहचान और न्याय दिलाने में फॉरेंसिक की अहम भूमिका'

सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि होती है और कई बार मृतकों की पहचान करना बेहद कठिन हो जाता है। ऐसे में फॉरेंसिक साइंस वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए सत्य को स्थापित कर मृतकों को उनके परिजनों तक पहुँचाने और न्याय दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाती है। उन्होंने युवाओं से फॉरेंसिक क्षेत्र में आगे आने और ग्रामीण इलाकों में निजी तकनीकी व चिकित्सा संस्थानों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।


प्रबंध निदेशक कृष्ण मुरारी ने कहा- '23 साल बाद सम्मेलन का आयोजन संस्थान के लिए गौरव की बात'

संस्थान के प्रबंध निदेशक कृष्ण मुरारी ने अपने संबोधन में कहा कि 23 वर्षों बाद इस राज्यस्तरीय फॉरेंसिक सम्मेलन की मेजबानी करना उनकी संस्था के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनके संस्थान में 22 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन फॉरेंसिक विभाग में नए ज्ञान, अनुभव और आधुनिक तकनीकों को समझने का एक बेहतरीन मंच सिद्ध होगा।


स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने का दोहराया संकल्प

प्रबंध निदेशक ने कहा कि उनका संस्थान आने वाले दिनों में समाज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम के अंत में आए हुए सभी फॉरेंसिक विशेषज्ञों और डॉक्टरों का आभार व्यक्त किया गया तथा चिकित्सा और न्यायिक अनुसंधान में फॉरेंसिक तकनीकों के बढ़ते प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई।


सुमित की रिपोर्ट